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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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Boong Makes History at 79th BAFTA Awards 2026: First Indian Regional Film to Win Best Children & Family Film

79वें BAFTA अवॉर्ड्स 2026 में ‘बूंग’ की ऐतिहासिक जीत: पहली भारतीय क्षेत्रीय फिल्म बनी बेस्ट चिल्ड्रेन एंड फैमिली फिल्म विजेता

भारतीय सिनेमा ने वैश्विक मंच पर एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। 2026 के 79वें BAFTA Awards में मणिपुरी भाषा की फिल्म ‘बूंग’ ने बेस्ट चिल्ड्रेंस एंड फैमिली फिल्म श्रेणी में विजय हासिल कर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि केवल एक पुरस्कार भर नहीं, बल्कि भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा की सृजनात्मक शक्ति और सांस्कृतिक विविधता की वैश्विक स्वीकृति का प्रमाण है।


वैश्विक मंच पर ‘बूंग’ की ऐतिहासिक जीत

लंदन के भव्य Royal Festival Hall में आयोजित इस समारोह में ‘बूंग’ भारत की एकमात्र नामांकित फिल्म थी। इसने हॉलीवुड की चर्चित फिल्मों—आर्को, लिलो एंड स्टिच और जूटोपिया 2—को पीछे छोड़ते हुए यह सम्मान अर्जित किया।

यह जीत इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह पहली बार है जब भारत ने इस श्रेणी में BAFTA अवॉर्ड जीता है। मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्य से आई एक अपेक्षाकृत छोटे बजट की फिल्म का अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों को पछाड़ना भारतीय सिनेमा के बदलते परिदृश्य का प्रतीक है।

कहानी: मासूमियत, संघर्ष और उम्मीद

"Boong" एक भावुक और विचारोत्तेजक कमिंग-ऑफ-एज ड्रामा है, जो मणिपुर की घाटी में रहने वाले एक नन्हे लड़के की आँखों से पूरी दुनिया को दिखाती है।

मुख्य किरदार है बूंग (Brojendro "Boong" Singh), एक शरारती, मासूम और बहादुर 9 साल का स्कूल बॉय (गुगुन किपगेन), जो अपनी माँ मंदाकिनी (बाला हिजाम) के साथ इंफाल में रहता है। उसके पिता जयकुमार (या जॉयकुमार) कई साल पहले बेहतर कमाई की तलाश में बॉर्डर टाउन मोरेह चले गए थे, जहाँ उन्होंने फर्नीचर की दुकान खोली थी। लेकिन कुछ समय बाद फोन आना बंद हो गया। परिवार को कोई खबर नहीं मिलती।

धीरे-धीरे गांव में अफवाह फैलने लगती है कि पिता की मौत हो चुकी है। कुछ लोग माँ को विधवा घोषित करने की कोशिश करते हैं। मंदाकिनी इन अफवाहों को मानने से इनकार करती है, लेकिन अंदर से बहुत दुखी और टूटी हुई रहती है। बूंग अपनी माँ की यह उदासी देखकर बहुत परेशान होता है। वह सोचता है कि अगर वह पापा को ढूंढकर घर वापस ला दे, तो माँ फिर से हँसने लगेगी। उसके लिए यह सबसे बड़ा और सबसे खास "गिफ्ट" होगा।

इसलिए बूंग अपने सबसे अच्छे दोस्त राजू (अंगोम सनामतुम) के साथ मिलकर एक बड़ा एडवेंचर शुरू करता है। राजू राजस्थान से आया हुआ एक बच्चा है, जो लोकल बच्चों द्वारा कभी-कभी ताने सुनता है। दोनों बच्चे मिलकर मोरेह की ओर निकल पड़ते हैं। सफर में वे कई मुश्किलों का सामना करते हैं — बॉर्डर की सख्ती, सुरक्षा बल, और अंत में वे भारत-म्यांमार बॉर्डर पार करके म्यांमार तक भी पहुँच जाते हैं।

रास्ते में बूंग की शरारतें फिल्म को हल्का और मजेदार बनाती हैं — जैसे स्लिंगशॉट से प्रैंक करना, Madonna के गाने गुनगुनाना, या छोटी-छोटी हरकतें। लेकिन साथ ही बच्चे की नजर से मणिपुर की कड़वी हकीकत भी सामने आती है: नस्लीय तनाव और भेदभाव, जातीय संघर्ष, ट्रांसजेंडर लोगों के साथ होने वाली भेदभाव, बढ़ती हिंसा, राजनीतिक साजिशें, और बॉर्डर इलाके की अनिश्चितता। कुछ लोग पिता की मौत की अफवाह फैलाने में राजनीतिक या अन्य स्वार्थ रखते हैं।

बूंग की यह खोज सिर्फ पिता को ढूंढने की नहीं रह जाती। यह यात्रा उसे दुनिया की जटिलताओं, सच और झूठ, उम्मीद और निराशा के बारे में बहुत कुछ सिखाती है। अंत में उसकी तलाश एक अप्रत्याशित मोड़ लेती है — जहां सपने और हकीकत टकराते हैं। पिता शायद घर वापस नहीं आता (या आने से इनकार करता है), लेकिन बूंग को एक नई समझ, नई ताकत और परिवार के प्यार की नई परिभाषा मिलती है। यह एक नई शुरुआत बन जाती है — माँ-बेटे के रिश्ते में, और खुद बूंग के बड़े होने में।

फिल्म हार्टवार्मिंग है, हास्य से भरी है, लेकिन गहरे सामाजिक मुद्दों को बहुत संवेदनशीलता से छूती है — बिना बच्चों के लिए भारी हुए। यह दिखाती है कि मासूमियत की ताकत से भी दुनिया बदली जा सकती है, और उम्मीद कभी नहीं मरती।

(कुल लंबाई: लगभग 94 मिनट। BAFTA 2026 में Best Children's and Family Film जीत चुकी है। अगर आप भावुक लेकिन मजबूत कहानियाँ पसंद करते हैं, तो यह जरूर देखें!)

निर्देशक की दृष्टि और सृजनात्मकता

इस फिल्म का लेखन और निर्देशन लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है—यह उनकी पहली फीचर फिल्म है। उन्होंने मणिपुर की सांस्कृतिक गहराई, स्थानीय बोली-बानी और सामाजिक संवेदनाओं को जिस आत्मीयता से प्रस्तुत किया है, वह फिल्म को वैश्विक स्तर पर भी प्रामाणिक बनाता है।

निर्माण में Excel Entertainment की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसकी स्थापना Farhan Akhtar और Ritesh Sidhwani ने की है। BAFTA समारोह में फरहान अख्तर स्वयं टीम के साथ उपस्थित थे और उन्होंने इस परियोजना से जुड़ना “एक स्वाभाविक और सही निर्णय” बताया।

वैश्विक फिल्म समारोहों की यात्रा

‘बूंग’ की अंतरराष्ट्रीय यात्रा 2024 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के डिस्कवरी सेक्शन से आरंभ हुई। इसके बाद इसने वारसॉ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, MAMI मुंबई फिल्म फेस्टिवल, 55वें IFFI और इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न 2025 में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इन मंचों पर मिली सराहना ने BAFTA नामांकन की राह प्रशस्त की। फिल्म ने कनाडा के इंटरनेशनल साउथ एशियन फिल्म फेस्टिवल में एक्सीलेंस इन फीचर फिल्ममेकिंग तथा ऑस्ट्रेलिया के 17वें एशिया पैसिफिक स्क्रीन अवॉर्ड्स में बेस्ट यूथ फिल्म जैसे सम्मान भी प्राप्त किए। गुगुन किपगेन को मेलबर्न में विशेष उल्लेख के साथ सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान मिला।

समारोह में भारतीय उपस्थिति

समारोह के दौरान भारतीय अभिनेत्री Alia Bhatt ने भी एक पुरस्कार प्रस्तुत किया। रेड कार्पेट पर उनकी उपस्थिति ने भारतीय सिनेमा की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को और अधिक रेखांकित किया।

क्षेत्रीय सिनेमा की वैश्विक स्वीकृति

‘बूंग’ की जीत इस बात का सशक्त प्रमाण है कि भारतीय सिनेमा अब केवल मुख्यधारा की बॉलीवुड फिल्मों तक सीमित नहीं है। क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय कहानियों में वह शक्ति है जो वैश्विक दर्शकों को भी भावनात्मक रूप से जोड़ सकती है।

मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्य से आई यह फिल्म भाषा और बजट की सीमाओं को तोड़ते हुए यह संदेश देती है कि सच्ची कला की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती।

निष्कर्ष: विविधता ही असली शक्ति

‘बूंग’ की BAFTA विजय भारतीय सिनेमा के लिए केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक दिशा है—विविधता की दिशा, स्थानीयता की दिशा और संवेदनशील कहानी कहने की दिशा।

यह फिल्म बताती है कि जब सिनेमा अपनी जड़ों से जुड़ा होता है, तो वह वैश्विक दर्शकों के दिलों में भी जगह बना सकता है।

भारतीय सिनेमा का यह नया अध्याय गर्व, आशा और संभावनाओं से भरा है। सचमुच, सच्ची कला सीमाओं को नहीं मानती—और ‘बूंग’ इसका जीवंत प्रमाण है।

Source 

British Academy of Film and Television Arts (BAFTA) – आधिकारिक वेबसाइट और 79वें BAFTA अवॉर्ड्स 2026 की विजेताओं की सूची।

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