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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

Zoharan Mamdani’s Historic Victory: A Progressive Wave Reshapes New York City Politics (2025)

ज़ोहरान ममदानी का ऐतिहासिक चुनाव: न्यूयॉर्क सिटी राजनीति में प्रगतिशील उभार

प्रस्तावना

4 नवंबर 2025 को जब न्यूयॉर्क सिटी के मतदाताओं ने 34 वर्षीय लोकतांत्रिक समाजवादी ज़ोहरान ममदानी को अपना 111वाँ मेयर चुना, तो यह केवल अमेरिका के सबसे बड़े महानगर के राजनीतिक परिदृश्य का बदलाव नहीं था — यह उस विचारधारा का उभार था, जो समानता, सामाजिक न्याय और राजनीतिक पारदर्शिता की नई परिभाषा प्रस्तुत कर रही है।

भारतवंशी मुस्लिम और दक्षिण एशियाई मूल के ममदानी का चुनाव केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि वैश्विक महानगरों में उभरती प्रगतिशील राजनीति का सशक्त उदाहरण भी है। यह उस दौर में हुआ है जब अमेरिका की राजनीति गहरे ध्रुवीकरण, पहचान की राजनीति और आर्थिक विषमता से गुजर रही है।


ज़ोहरान ममदानी: एक समाजवादी विचारक की जमीनी यात्रा

ज़ोहरान ममदानी की कहानी विस्थापन से नेतृत्व की कहानी है।
उनका जन्म युगांडा में भारतीय मूल के परिवार में हुआ था, जहाँ उनके माता-पिता ने इदी अमीन शासन के दौरान उत्पीड़न का सामना किया। यही अनुभव आगे चलकर ममदानी के राजनीतिक दृष्टिकोण का मूल बना।

न्यूयॉर्क में बसने के बाद, उन्होंने Bronx High School of Science और Bowdoin College से शिक्षा प्राप्त की। राजनीति में आने से पहले वे हाउसिंग काउंसलर और हिप-हॉप संगीतकार के रूप में कार्यरत थे — जिसने उन्हें शहरी गरीबी, जातीय असमानता और युवाओं के संघर्षों से सीधे जोड़ा।

2020 में जब वे क्वींस के 36वें विधानसभा क्षेत्र से न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के लिए चुने गए, तो वे शीघ्र ही Democratic Socialists of America (DSA) के प्रमुख चेहरों में से एक बन गए।
किराया नियंत्रण, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा, पुलिस सुधार और फ़िलिस्तीनी अधिकारों पर उनके स्पष्ट रुख ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दी।

उनकी लोकप्रियता उस समय और बढ़ी जब उन्होंने Amazon HQ2 परियोजना के विरोध का नेतृत्व किया, जिसे उन्होंने “कॉरपोरेट लाभ पर जनहित की जीत” कहा। इस घटना ने उन्हें एंटी-कॉर्पोरेट प्रगतिशील के प्रतीक के रूप में स्थापित किया।


2025 का चुनाव: विचारधाराओं की निर्णायक भिड़ंत

2025 का न्यूयॉर्क सिटी मेयर चुनाव केवल उम्मीदवारों का नहीं, बल्कि विचारधाराओं का जनमत संग्रह था।

एंड्र्यू कुओमो, जो कभी न्यूयॉर्क के शक्तिशाली गवर्नर रहे, अपनी राजनीतिक पुनर्वापसी की कोशिश में थे। वहीं, रिपब्लिकन कर्टिस स्लिवा “कानून और व्यवस्था” के एजेंडे के साथ मैदान में थे। इन दोनों अनुभवी नेताओं के बीच ममदानी का अभियान युवा, विविध और जमीनी था।

उन्होंने अपने अभियान को तीन केंद्रीय मुद्दों पर केंद्रित किया —

  1. किफायती आवास और किराया नियंत्रण
  2. नस्लीय एवं आर्थिक न्याय
  3. सार्वजनिक परिवहन और पर्यावरणीय सुधार

उनका नारा था — “People before Profit” (लाभ से पहले लोग)।

सोशल मीडिया और डिजिटल कैम्पेनिंग में दक्ष ममदानी ने अपनी पूरी रणनीति ग्रासरूट एक्टिविज़्म पर केंद्रित रखी।
उनके साथ युवा मतदाता, आप्रवासी समुदाय, श्रमिक यूनियनें और प्रगतिशील समूहों की एक विशाल लामबंदी खड़ी हुई।

वहीं कुओमो के पास 50 मिलियन डॉलर का युद्ध कोष और कॉर्पोरेट दानदाता थे।
लेकिन, ममदानी ने इस असमान मुकाबले को “जन बनाम पूँजी” का नैरेटिव देकर पलट दिया।

अंततः 52% मतों के साथ ममदानी ने जीत दर्ज की — जो 1969 के बाद सबसे अधिक मतदान वाला चुनाव था।
इस जीत ने यह दिखा दिया कि युवा, आप्रवासी और रंगीन समुदायों की एकजुटता, अमेरिका की पारंपरिक राजनीति को चुनौती देने में सक्षम है।


सामाजिक प्रतिनिधित्व और पहचान की राजनीति

ममदानी का चुनाव केवल नीति-आधारित नहीं था, बल्कि पहचान-आधारित सशक्तिकरण का प्रतीक भी था।
वे न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम, दक्षिण एशियाई और भारतीय मूल के मेयर बने।

भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल से आए प्रवासी समुदायों ने पहली बार महसूस किया कि उनकी आवाज़ अमेरिकी लोकतंत्र में वास्तविक रूप से प्रतिनिधित्व पा सकती है।
ब्रुकलिन और क्वींस के मुस्लिम इलाकों में 80% से अधिक मतदान ममदानी के पक्ष में गया — जो प्रवासी राजनीति के उभार का संकेत है।


नीति एजेंडा: प्रगतिशील लोकलुभावनवाद का प्रयोग

ममदानी का विज़न “सोशलिस्ट गवर्नेंस” का शहरी प्रयोग है।
उनके मुख्य प्रस्ताव इस प्रकार हैं —

  • फ्री पब्लिक ट्रांसपोर्ट: मेट्रो और बस सेवाओं को सार्वजनिक अनुदान से निःशुल्क करना।
  • सिटीवाइड किराया फ्रीज़: किरायों में बढ़ोतरी पर रोक।
  • ग्रीन न्यू डील फॉर NYC: नवीकरणीय ऊर्जा, हरित नौकरियाँ और पर्यावरणीय न्याय पर निवेश।
  • सार्वभौमिक बाल देखभाल और स्वास्थ्य सेवा: शहर स्तर पर कल्याणकारी योजनाएँ।
  • पुलिस सुधार: सामुदायिक पुलिसिंग और सामाजिक हस्तक्षेपों पर जोर।

ये प्रस्ताव बर्नी सैंडर्स मॉडल से प्रेरित हैं, लेकिन स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढाले गए हैं।

हालाँकि, इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय व्यवहार्यता की है।
ममदानी ने उच्च आय वर्ग पर कर बढ़ाने और कॉर्पोरेट टैक्स में सुधार की बात की है, परंतु इससे मध्यमार्गी डेमोक्रेट्स और व्यावसायिक लॉबी में असंतोष है।


चुनौतियाँ और संभावनाएँ

  1. वित्तीय संकट का खतरा
    विशेषज्ञों का अनुमान है कि ममदानी की नीतियाँ शहर के बजट पर $10 बिलियन का बोझ डाल सकती हैं।
    लेकिन समर्थकों का कहना है कि यह निवेश सामाजिक लाभांश के रूप में लौटेगा।

  2. संघीय टकराव
    राष्ट्रपति ट्रम्प की नीतियों के विरोध में ममदानी की खुली स्थिति से संघीय सहायता पर खतरा मंडरा सकता है।
    न्यूयॉर्क को अब ऑल्बनी और वाशिंगटन दोनों में नए गठबंधन बनाने होंगे।

  3. प्रशासनिक अनुभव की कमी
    आलोचक उन्हें “आदर्शवादी, लेकिन अनुभवहीन” बताते हैं।
    हालांकि असेंबली में दर्जनों विधेयक पारित कराने का उनका रिकॉर्ड, उनकी नीतिगत समझ को पुष्ट करता है।

  4. राजनीतिक संदेश
    ममदानी की जीत यह संकेत देती है कि अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर भी एक वैचारिक पुनर्संरेखण जारी है —
    जहाँ अब केंद्रवाद के बजाय आर्थिक पुनर्वितरण और सामाजिक न्याय का स्वर बुलंद हो रहा है।


भारतीय दृष्टिकोण से विश्लेषण

भारत के लिए ममदानी की जीत कई मायनों में प्रेरणादायक है —

  • यह भारतीय प्रवासियों के वैश्विक प्रभाव का प्रमाण है।
  • यह दिखाती है कि भारतीय मूल के नेता अब केवल तकनीकी क्षेत्र में नहीं, बल्कि राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
  • यह प्रवासी समुदायों की “राजनीतिक परिपक्वता” और “सामाजिक एकजुटता” की मिसाल है।
  • भारतीय लोकतंत्र के संदर्भ में भी, ममदानी का अभियान यह दिखाता है कि विचारधारात्मक स्पष्टता, जमीनी संगठन और जनसरोकार आधारित एजेंडा किसी भी शक्तिशाली राजनीतिक तंत्र को चुनौती दे सकता है।

निष्कर्ष

ज़ोहरान ममदानी की 2025 में न्यूयॉर्क सिटी मेयर के रूप में जीत केवल एक स्थानीय घटना नहीं — यह वैश्विक लोकतांत्रिक प्रयोग का प्रतीक है।
उन्होंने यह साबित किया कि आदर्शवाद और यथार्थ के बीच पुल बनाया जा सकता है, बशर्ते राजनीति का आधार जन हित और न्यायपूर्ण विकास हो।

उनकी सफलता यह दर्शाती है कि अमेरिका जैसे पूंजीवादी समाज में भी लोकलुभावन समाजवादी राजनीति को स्थान मिल सकता है —
और यदि यह मॉडल सफल होता है, तो यह आने वाले वर्षों में शहरी शासन, प्रवासी राजनीति और लोकतांत्रिक समाजवाद की दिशा तय करेगा।


संदर्भ

  1. The Guardian, 4 Nov 2025 — “Zoharan Mamdani’s Historic Election as NYC Mayor”
  2. The New York Times, 4 Nov 2025 — “Record Turnout Propels Mamdani to Victory”
  3. NBC News & Al Jazeera, 4 Nov 2025 — “NYC Mayoral Results: Mamdani Defeats Cuomo”
  4. CNBC & ABC News Reports, 4 Nov 2025 — “Zoharan Mamdani Elected Mayor of New York City”
  5. Wikipedia Contributors — “2025 New York City Mayoral Election”


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