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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

India Reopens Embassy in Afghanistan: A New Era of Taliban Engagement

भारत-तालिबान संबंधों का उन्नयन: दूतावास पुनर्जनन और नई कूटनीतिक शुरुआत

परिचय

भारत ने हाल ही में अफगानिस्तान में अपने दूतावास को पुनर्जनन करने का निर्णय लिया है, जो तालिबान शासन के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कदम भारत की विदेश नीति में एक नए चरण का प्रतीक है, जो क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक हितों को संतुलित करने की कोशिश को दर्शाता है। यह लेख भारत के इस निर्णय के कूटनीतिक, रणनीतिक और क्षेत्रीय निहितार्थों का विश्लेषण करता है, साथ ही यह भी जांचता है कि यह कदम भारत-अफगानिस्तान संबंधों को कैसे प्रभावित कर सकता है।

पृष्ठभूमि

भारत और अफगानिस्तान के बीच ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं। भारत ने 2001 के बाद अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में अरबों डॉलर का निवेश किया। सलमा बांध, अफगान संसद भवन और विभिन्न शैक्षिक परियोजनाएं भारत की प्रतिबद्धता के उदाहरण हैं। हालांकि, 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद भारत ने काबुल में अपने दूतावास को बंद कर दिया था, क्योंकि तालिबान के साथ औपचारिक कूटनीतिक संबंध स्थापित करने को लेकर अनिश्चितता थी।

अब, दूतावास को पुनर्जनन करने का निर्णय भारत की बदलती रणनीति को दर्शाता है। यह कदम क्षेत्रीय शक्तियों, विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान, के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की आवश्यकता से प्रेरित हो सकता है, जो तालिबान के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।

निर्णय के कारण और प्रेरणाएँ

  1. क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा: अफगानिस्तान में स्थिरता दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। भारत के लिए, आतंकवाद का खतरा, विशेष रूप से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों से, जो अफगानिस्तान में पनाह ले सकते हैं, एक प्रमुख चिंता है। तालिबान के साथ कूटनीतिक जुड़ाव भारत को आतंकवाद-रोधी प्रयासों में सहयोग करने और खुफिया जानकारी साझा करने का अवसर प्रदान करता है।

  2. आर्थिक हित: अफगानिस्तान मध्य एशिया के लिए एक प्रवेश द्वार है, और भारत के लिए चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) जैसे परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है। तालिबान के साथ बेहतर संबंध इन परियोजनाओं को गति दे सकते हैं।

  3. क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा: चीन और पाकिस्तान ने तालिबान शासन के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है। चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत अफगानिस्तान में निवेश की योजनाएं बनाई हैं, जबकि पाकिस्तान का तालिबान के साथ ऐतिहासिक संबंध रहा है। भारत का यह कदम क्षेत्र में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने और प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति का हिस्सा है।

  4. मानवीय और सॉफ्ट पावर: भारत ने अफगानिस्तान में अपनी मानवीय सहायता और सॉफ्ट पावर कूटनीति के माध्यम से व्यापक सद्भावना अर्जित की है। दूतावास का पुनर्जनन भारत को अफगान जनता के साथ अपने संबंधों को पुनर्जनन करने और मानवीय सहायता प्रदान करने का अवसर देगा।

निहितार्थ

  1. कूटनीतिक निहितार्थ: यह कदम भारत की "रणनीतिक स्वायत्तता" नीति को दर्शाता है, जिसमें वह वैश्विक और क्षेत्रीय शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखता है। तालिबान के साथ जुड़ाव भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस जैसे अन्य वैश्विक खिलाड़ियों के साथ अपनी स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

  2. क्षेत्रीय गतिशीलता: भारत का यह कदम पाकिस्तान के लिए एक चुनौती हो सकता है, जो अफगानिस्तान में अपने प्रभाव को बनाए रखना चाहता है। साथ ही, यह मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत कर सकता है।

  3. आंतरिक चुनौतियाँ: तालिबान के साथ औपचारिक संबंध स्थापित करने का निर्णय भारत में आंतरिक बहस को जन्म दे सकता है, विशेष रूप से तालिबान के मानवाधिकार रिकॉर्ड और महिलाओं के प्रति उनके दृष्टिकोण को लेकर। भारत को इस संवेदनशील मुद्दे पर सावधानीपूर्वक संतुलन बनाना होगा।

आलोचनात्मक विश्लेषण

भारत का यह कदम व्यावहारिक कूटनीति का उदाहरण है, जो वास्तविकता को स्वीकार करता है कि तालिबान वर्तमान में अफगानिस्तान में सत्ता में है। हालांकि, यह निर्णय जोखिमों से रहित नहीं है। तालिबान की वैधता और उनकी नीतियों, विशेष रूप से आतंकवाद और मानवाधिकारों के प्रति उनके रुख, पर वैश्विक समुदाय की नजर रहेगी। भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका जुड़ाव तालिबान को वैधता प्रदान करने के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे।

निष्कर्ष

भारत का अफगानिस्तान में दूतावास पुनर्जनन करने का निर्णय एक रणनीतिक कदम है, जो क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक अवसरों और कूटनीतिक प्रासंगिकता को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया है। यह कदम भारत की विदेश नीति में लचीलापन और अनुकूलनशीलता को दर्शाता है। हालांकि, इस प्रक्रिया में भारत को तालिबान के साथ अपने संबंधों को सावधानीपूर्वक प्रबंधित करना होगा ताकि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अपने हितों की रक्षा हो सके। यह नया चरण भारत-अफगानिस्तान संबंधों को फिर से परिभाषित करने की क्षमता रखता है, बशर्ते इसे रणनीतिक और नैतिक संतुलन के साथ लागू किया जाए।

संदर्भ

  •  The Times of India: "India elevates its ties with Taliban, to reopen embassy."
  • भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर उपलब्ध विदेश मंत्रालय के दस्तावेज और विश्लेषण।



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