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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

European Union Integration Challenges: Brexit, France-Germany Dynamics, and Future Prospects

यूरोपीय संघ का एकीकरण और चुनौतियाँ: एक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण

यूरोपीय संघ (ईयू) लंबे समय से क्षेत्रीय एकीकरण का प्रतीक रहा है। इसकी नींव यही विचार लेकर रखी गई थी कि सदस्य देशों के बीच सहयोग और साझा नीतियों के माध्यम से शांति और समृद्धि सुनिश्चित की जा सके। आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर एकजुटता की यह परियोजना पिछले कई दशकों में कई उतार-चढ़ाव देख चुकी है।

हाल के वर्षों में ईयू की एकता पर विशेष रूप से ब्रेक्सिट ने सवाल खड़े किए। 2020 में ब्रिटेन का संघ से बाहर निकलना यह साबित करता है कि सदस्य देशों की अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताएँ और घरेलू राजनीतिक दबाव यूरोपीय एकीकरण को चुनौती दे सकते हैं। इसके बावजूद, ईयू ने बाहरी खतरों, जैसे रूस की आक्रामकता और अमेरिका की यूरोपीय सुरक्षा में अनिश्चित रुचि, के जवाब में एकजुट होने की क्षमता दिखाई।


ब्रेक्सिट और एकीकरण की चुनौतियाँ

ब्रेक्सिट के बाद ईयू के सामने यह चुनौती थी कि कैसे एक बड़े सदस्य देश की अनुपस्थिति के बावजूद समन्वय बनाए रखा जाए। रूस का यूक्रेन पर 2022 का आक्रमण और अमेरिका की नाटो संबंधी अनिश्चितता ने यूरोपीय रक्षा और सुरक्षा नीतियों की आवश्यकता को और बढ़ा दिया। इस पर प्रतिक्रिया स्वरूप यूरोपीय रक्षा कोष (EDF) और स्थायी संरचित सहयोग (PESCO) जैसी पहलें तेज हुईं।

इस प्रकार, ब्रेक्सिट के बाद ईयू ने यह सीखा कि आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सामूहिक सुरक्षा पर भी ध्यान देना अनिवार्य है। 27 सदस्य देशों ने एकजुट होकर न केवल रक्षा नीतियों में, बल्कि वैश्विक सुरक्षा मुद्दों में भी सामूहिक निर्णय लेने का प्रयास किया।


फ्रांस-जर्मनी गठजोड़: ईयू का इंजन

ईयू के इतिहास में फ्रांस और जर्मनी की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। यूरो की स्थापना, वित्तीय संकटों का प्रबंधन और हरित बदलाव जैसी पहलों में यह साझेदारी निर्णायक रही।

ब्रेक्सिट के बाद फ्रांस और जर्मनी ने सुरक्षा और आर्थिक नीतियों में अपनी भागीदारी और भी मजबूत की। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने “रणनीतिक स्वायत्तता” की अवधारणा को बढ़ावा दिया, जिसका उद्देश्य ईयू को अमेरिका जैसी बाहरी शक्तियों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित करना था। जर्मनी ने इसके समर्थन में अपने सशस्त्र बलों के लिए 100 बिलियन यूरो के विशेष कोष की घोषणा की।

इस गठजोड़ ने यूरोपीय स्काई शील्ड और फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम जैसी रक्षा परियोजनाओं को गति दी। साथ ही, दोनों देशों ने यूरोपीय ग्रीन डील और डिजिटल परिवर्तन में भी सहयोग बढ़ाया, ताकि ईयू आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से भी एकजुट रहे।


फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता

2024 की गर्मियों से फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता ने ईयू में उसकी नेतृत्व क्षमता को कमजोर किया है। राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा बुलाए गए संसदीय चुनावों में कोई स्पष्ट बहुमत नहीं आया। दक्षिणपंथी और वामपंथी दलों के उदय ने नीति निर्माण में बाधा डाली।

यह अस्थिरता फ्रांस के यूरोपीय मंच पर नेतृत्व को भी प्रभावित कर रही है। मैक्रों का रणनीतिक स्वायत्तता का एजेंडा, जो ईयू की सामूहिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण था, अब घरेलू दबाव और राजनीतिक उलझनों के कारण कमजोर हो गया है। इसके कारण फ्रांस-जर्मनी गठजोड़ में असंतुलन पैदा हुआ और ईयू के व्यापक एकीकरण प्रयासों को चुनौती मिली।


जर्मनी में आर्थिक ठहराव

इसी समय, जर्मनी की अर्थव्यवस्था 2024 से कई चुनौतियों का सामना कर रही है। निर्यात-आधारित उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, उच्च ऊर्जा लागत और चीन जैसी अर्थव्यवस्थाओं में गिरती मांग से नुकसान हुआ। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, और जर्मनी की राजकोषीय रूढ़िवादिता ने सार्वजनिक निवेश को सीमित किया।

जर्मनी की आर्थिक धीमी गति का असर पूरे ईयू पर पड़ा। यूरो क्षेत्र की स्थिरता में गिरावट और नवाचार तथा हरित प्रौद्योगिकी में निवेश की मांग को बढ़ावा मिला। इसके साथ ही, जर्मनी का ध्यान घरेलू आर्थिक मुद्दों पर होने के कारण ईयू-व्यापी पहलों में कमी आई।


ईयू के लिए निहितार्थ

फ्रांस और जर्मनी की चुनौतियाँ ईयू के व्यापक एकीकरण के लिए अहम हैं। रूस की आक्रामकता और अमेरिका की नीति की अनिश्चितता को देखते हुए सामूहिक रक्षा नीति की आवश्यकता है। वहीं, फ्रांस की राजनीतिक अस्थिरता और जर्मनी की आर्थिक मंदी ईयू की निर्णय क्षमता को कमजोर कर रही है।

भविष्य में ईयू को अन्य सदस्य देशों—जैसे पोलैंड, इटली और स्पेन—के नेतृत्व और संसाधनों पर भरोसा बढ़ाना होगा। यूरोपीय आयोग और संसद जैसी संस्थाओं को मजबूत करना भी आवश्यक है। आर्थिक मोर्चे पर, हरित और डिजिटल निवेश को प्राथमिकता देने और सदस्य देशों के बीच असमानताओं को कम करने की जरूरत है, ताकि ब्लॉक अधिक एकजुट और स्थायी बने।


निष्कर्ष

यूरोपीय संघ आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। ब्रेक्सिट के बाद सुरक्षा और आर्थिक समन्वय के क्षेत्र में आशाजनक कदम उठाए गए हैं, जो फ्रांस-जर्मनी साझेदारी द्वारा संचालित रहे। हालांकि, 2024 की गर्मियों से फ्रांस की राजनीतिक अस्थिरता और जर्मनी की आर्थिक मंदी इस साझेदारी की मजबूती को चुनौती दे रही है। भविष्य में ईयू को व्यापक नेतृत्व, मजबूत संस्थान और असमानताओं का संतुलन बनाए रखना होगा। केवल इसी तरह से ब्लॉक आंतरिक और बाहरी दबावों का सामना करते हुए अपने एकीकरण की दिशा में आगे बढ़ सकता है।


संदर्भ:

  1. The Washington Post, “The European Union Seemed to Be Coming Together,” 19 अक्टूबर 2025,
  2. European Union Official Defense Policies, European Defense Fund (EDF), PESCO Reports, 2025
  3. France-Germany Relations and EU Economic Policies, 2024–2025, European Commission Publications

UPSC Mains – General Studies Paper II (Governance, Constitution, Polity, Social Justice and International relations)

2019 में पूछा गया प्रश्न:

"यूरोपीय संघ (EU) के विकास में फ्रांस और जर्मनी की भूमिका का मूल्यांकन करें।"

विश्लेषण:

इस प्रश्न में, UPSC ने यूरोपीय संघ के विकास में फ्रांस और जर्मनी की केंद्रीय भूमिका की समीक्षा करने के लिए कहा था। यह प्रश्न यूरोपीय संघ के संस्थागत ढांचे, फ्रांस और जर्मनी के द्विपक्षीय संबंधों, और उनके संयुक्त प्रयासों जैसे कि यूरोपीय एकल बाजार, यूरो मुद्रा, और यूरोपीय सुरक्षा और रक्षा नीति (CSDP) पर केंद्रित था।

UPSC Mains / GS Paper 2 & 3 संभावित प्रश्न

1. “ब्रेक्सिट के बाद यूरोपीय संघ के एकीकरण प्रयासों में फ्रांस-जर्मनी गठजोड़ की भूमिका का मूल्यांकन करें।”

2. “फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता और जर्मनी में आर्थिक ठहराव का यूरोपीय संघ की सामूहिक निर्णय क्षमता पर प्रभाव विश्लेषित करें।”

3. “यूरोपीय संघ की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ अवधारणा की आवश्यकता और इसके वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव पर चर्चा करें।”

4. “आर्थिक और रक्षा एकीकरण के माध्यम से यूरोपीय संघ किस प्रकार आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है?”

5. “ब्रेक्सिट ने यूरोपीय संघ की संरचना और सदस्य देशों की नीतिगत प्राथमिकताओं पर किस प्रकार प्रभाव डाला?”

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