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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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Afghanistan–Pakistan Peace Talks in Istanbul: Ceasefire Extension and the Road Ahead for Regional Stability (October 2025)

अफगानिस्तान–पाकिस्तान वार्ता: इस्तांबुल में मध्यस्थता के बाद निरंतर चर्चा का समझौता

सारांश

31 अक्टूबर 2025 को समाप्त हुई अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच इस्तांबुल में आयोजित बहु-दिवसीय वार्ताओं ने क्षेत्रीय तनाव को कुछ हद तक कम करने का संकेत दिया। तुर्की और कतर की मध्यस्थता में हुई इस वार्ता में दोनों देशों ने सीजफायर बनाए रखने और भविष्य में बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। चर्चा के मुख्य मुद्दे सीमा पार हमले, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ कार्रवाई, और व्यापारिक सीमा बिंदुओं को फिर से खोलने से संबंधित रहे। यह समझौता अक्टूबर 2025 में हुई हिंसक झड़पों के बाद आया, जिन्हें 2021 के बाद सबसे घातक सीमा संघर्ष माना गया था। यह लेख वार्ता की पृष्ठभूमि, इसके प्रमुख आयामों और क्षेत्रीय प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।


परिचय

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के संबंध ऐतिहासिक रूप से अविश्वास, सीमाई विवादों और आतंकवाद के मुद्दों से प्रभावित रहे हैं। डुरांड लाइन को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद ब्रिटिश काल से चला आ रहा है। 2021 में तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद से इन संबंधों में नए तनाव उभर आए — पाकिस्तान का आरोप रहा कि अफगानिस्तान ने TTP जैसे समूहों को शरण दी, जबकि तालिबान ने पाकिस्तान पर अफगान संप्रभुता का उल्लंघन करने के आरोप लगाए।

अक्टूबर 2025 में दोनों देशों के बीच हिंसक झड़पों में कई दर्जन लोग मारे गए। पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों ने स्थिति को और बिगाड़ा, जिसके बाद 19 अक्टूबर को दोहा में कतर की मध्यस्थता में अस्थायी सीजफायर हुआ। इस्तांबुल में आयोजित नई वार्ता (25–30 अक्टूबर) इसी समझौते को स्थिर करने का प्रयास थी, जिसने 6 नवंबर को अगली बैठक तय करते हुए संवाद जारी रखने की उम्मीद जगाई।


पृष्ठभूमि: सीमा तनाव और अविश्वास का इतिहास

2,600 किलोमीटर लंबी डुरांड लाइन दक्षिण एशिया की सबसे विवादास्पद सीमाओं में से एक है। पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि अफगानिस्तान अब तक इसे स्वीकार नहीं करता। 2021 में तालिबान शासन आने के बाद पाकिस्तान ने उम्मीद की थी कि काबुल TTP पर अंकुश लगाएगा, परंतु इसके विपरीत, 2024 और 2025 में पाकिस्तान में हमलों में वृद्धि दर्ज की गई — 2024 में 2,500 से अधिक मौतें हुईं और 2025 में यह रुझान और बढ़ा।

अक्टूबर 2025 की हिंसा की शुरुआत 9 अक्टूबर को काबुल में हुए बम विस्फोटों से हुई, जिनका आरोप तालिबान ने पाकिस्तान पर लगाया। जवाब में पाकिस्तान ने सीमा पार हवाई हमले किए, जिनमें कथित तौर पर TTP के ठिकाने निशाना बने। इसके बाद अफगान बलों ने पाकिस्तानी चौकियों पर हमले किए, जिनमें लगभग 70 लोग मारे गए। इस परिदृश्य में तुर्की और कतर की मध्यस्थता से इस्तांबुल वार्ता शुरू हुई।


वार्ता की गतिशीलता

इस्तांबुल वार्ता में अफगान पक्ष का नेतृत्व रक्षा मंत्री मुल्ला मोहम्मद याकूब मुजाहिद और विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने किया, जबकि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल में रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ और सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार शामिल थे। तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन और कतर के वरिष्ठ राजनयिकों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

मुख्य एजेंडा बिंदु:

  1. TTP पर कार्रवाई: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से ठोस और सत्यापित कदम उठाने की मांग की।
  2. सीमा सुरक्षा: सीमा पार हमलों को रोकने के लिए निगरानी तंत्र और सैन्य हॉटलाइन स्थापित करने का प्रस्ताव।
  3. व्यापारिक सीमा क्रॉसिंग्स: टोरखम और स्पिन बोल्डक जैसे मार्गों को पुनः खोलने पर चर्चा।

वार्ता प्रारंभिक चरण में काफी तनावपूर्ण रही। पाकिस्तान ने तालिबान पर “दोहरी नीति” अपनाने का आरोप लगाया, जबकि काबुल ने पाकिस्तानी हवाई हमलों को “संप्रभुता का उल्लंघन” बताया। 28 अक्टूबर को वार्ता असफल घोषित होने की आशंका बनी, लेकिन तुर्की और कतर के आग्रह पर इसे 30 अक्टूबर तक बढ़ाया गया।

अंततः तुर्की विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि “दोनों पक्षों ने सीजफायर बनाए रखने और चर्चा जारी रखने पर सहमति जताई है।”

पक्ष प्रमुख मांगें प्रमुख अवरोध
पाकिस्तान TTP पर कार्रवाई; सैन्य हॉटलाइन अफगान अस्वीकृति
अफगानिस्तान हवाई हमलों पर रोक; संप्रभुता का सम्मान पाकिस्तानी दबाव
मध्यस्थ (तुर्की/कतर) सीजफायर विस्तार; निगरानी तंत्र पारस्परिक अविश्वास

परिणाम और विश्लेषण

वार्ता के समापन पर अफगान प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि “दोनों पक्षों ने चर्चाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है।” यह बयान कम-से-कम संवाद के दरवाजे खुले रखने का संकेत था।

प्रमुख परिणाम:

  • मौजूदा सीजफायर को बनाए रखने की सहमति।
  • निगरानी तंत्र और सैन्य हॉटलाइन की स्थापना।
  • सीमा क्रॉसिंग्स को चरणबद्ध तरीके से पुनः खोलने पर विचार।

हालांकि, TTP के मुद्दे पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। पाकिस्तान ने चेताया कि यदि हमले जारी रहे, तो “अफगानिस्तान में गहराई तक सैन्य कार्रवाई की जाएगी।” विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति केवल विश्वास-निर्माण के माध्यम से सुधर सकती है, अन्यथा दोनों देशों के बीच “सीमित युद्ध” की संभावना बनी रहेगी।

ईरान, रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों ने भी तालिबान से TTP को नियंत्रित करने का आग्रह किया है, क्योंकि क्षेत्रीय अस्थिरता का सीधा प्रभाव उनके सुरक्षा हितों पर पड़ता है।


निहितार्थ

घरेलू स्तर पर, पाकिस्तान के लिए यह समझौता आतंकवादी हमलों में कमी लाने का अवसर प्रदान करता है, जबकि अफगानिस्तान को बंद सीमाओं से हुई आर्थिक हानि से राहत मिल सकती है।

क्षेत्रीय स्तर पर, यह संवाद दक्षिण एशिया में स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। यदि बातचीत आगे बढ़ती है, तो यह आतंकवाद, तस्करी और शरणार्थी संकट जैसे मुद्दों को हल करने में सहायक हो सकती है।

वैश्विक स्तर पर, अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों की नजर इस प्रक्रिया पर बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि एक अस्थिर अफगानिस्तान और नाभिकीय पाकिस्तान का संयोजन वैश्विक सुरक्षा के लिए चुनौती बना हुआ है।


निष्कर्ष

इस्तांबुल वार्ता ने तत्काल टकराव को टाल दिया, लेकिन स्थायी शांति के लिए यह पर्याप्त नहीं है। TTP पर कार्रवाई, सीमा सुरक्षा और पारस्परिक विश्वास की बहाली ही दीर्घकालिक स्थिरता की कुंजी हैं। तुर्की और कतर ने मध्यस्थ के रूप में सकारात्मक भूमिका निभाई, परंतु वास्तविक समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सत्यापन और निरंतर कूटनीतिक दबाव आवश्यक है।

यह वार्ता दर्शाती है कि दक्षिण एशिया में संघर्ष के बीच भी संवाद की संभावना बनी हुई है — परंतु यह भी उतना ही स्पष्ट है कि इस शांति का आधार अभी बहुत नाजुक है।


संदर्भ

  • Reuters (2025, October 30). Afghanistan and Pakistan restart peace talks in Istanbul.
  • Al Jazeera (2025, October 28). Impasse leaves Afghanistan-Pakistan peace talks mired in uncertainty.
  • AP News (2025, October 29). Pakistan says peace talks with Afghanistan’s Taliban government in Istanbul failed after 4 days.


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