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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

Moldova Elections 2025: Pro-EU Victory Signals a Shift Away from Russia

“मोल्दोवा चुनाव 2025: प्रो-यूरोपीय संघ की ऐतिहासिक जीत और रूस से दूरी की नई दिशा”

पूर्वी यूरोप के छोटे मगर रणनीतिक रूप से अहम देश मोल्दोवा ने अपने हालिया संसदीय चुनाव में इतिहास रच दिया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रो-यूरोपीय संघ (EU) सत्तारूढ़ पार्टी ने रूस-समर्थित प्रतिद्वंद्वियों को हराकर स्पष्ट जनादेश हासिल किया है। यह सिर्फ चुनावी नतीजा नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक दिशा तय करने वाला निर्णय है — जो दर्शाता है कि मोल्दोवा अब रूस के प्रभाव क्षेत्र से निकलकर यूरोपीय परिवार का हिस्सा बनने की ओर बढ़ रहा है।

एक भू-राजनीतिक ‘टर्निंग प्वाइंट’

सोवियत विघटन के बाद से मोल्दोवा एक ऐसा देश रहा है जो दो ध्रुवों के बीच झूलता रहा — रूस और यूरोप। ट्रांसनिस्ट्रिया जैसे अलगाववादी क्षेत्रों में रूसी सैनिक मौजूद हैं, वहीं दूसरी ओर मोल्दोवा की नई पीढ़ी यूरोपीय लोकतांत्रिक मूल्यों और खुले बाजार की ओर झुकाव रखती है। यह चुनाव इस लंबे खिंचाव वाले रस्साकशी का निर्णायक मोड़ है।

जनादेश का संदेश: सुधार, पारदर्शिता और लोकतंत्र

राष्ट्रपति माइया सांडू के नेतृत्व में भ्रष्टाचार पर अंकुश, न्यायिक सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर अभियान पहले से ही जारी है। यूरोपीय संघ की सदस्यता की अनिवार्य शर्तें — कानून का शासन, आर्थिक स्थिरता और संस्थागत सुधार — मोल्दोवा की नीति-निर्माण की धुरी बन चुकी हैं। इस चुनाव ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता इन सुधारों को आगे बढ़ते देखना चाहती है।

रूस का प्रभाव: अभी भी एक ‘अनसुलझी फाइल’

हालांकि जनादेश यूरोप के पक्ष में है, मगर रूस का साया पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। ट्रांसनिस्ट्रिया का मुद्दा, रूसी ऊर्जा पर निर्भरता और मॉस्को समर्थक ताक़तों की राजनीतिक मौजूदगी — ये सभी मोल्दोवा के लिए निरंतर चुनौती बने हुए हैं। रूस अतीत में ऊर्जा आपूर्ति को हथियार की तरह इस्तेमाल कर चुका है, इसलिए मोल्दोवा को ऊर्जा स्वतंत्रता और रणनीतिक लचीलापन बढ़ाने पर प्राथमिकता देनी होगी।

यूरोपीय संघ की राह: उम्मीदें और कठिनाइयाँ

EU में शामिल होने का रास्ता लंबा और जटिल है। क़ानूनी ढांचे को यूरोपीय मानकों पर लाना, न्यायपालिका को मज़बूत करना और आर्थिक संतुलन कायम करना — यह सब एक सतत प्रक्रिया है। हालांकि, यह जीत यूरोपीय आयोग को भी स्पष्ट संदेश देती है कि मोल्दोवा यूरोप के साथ खड़ा होना चाहता है। यही कारण है कि ब्रसेल्स वित्तीय और तकनीकी सहायता के माध्यम से मोल्दोवा के सुधार एजेंडे को समर्थन दे रहा है।

निष्कर्ष: एक नई शुरुआत, लेकिन चुनौतीपूर्ण रास्ता

मोल्दोवा की यह जीत सिर्फ चुनावी आंकड़ा नहीं बल्कि राष्ट्र की सामूहिक आकांक्षाओं का बयान है। यह दर्शाता है कि जनता यूरोपीय मूल्यों को अपनाने और लोकतंत्र की राह पर चलने के लिए तैयार है। हालांकि, रूस के प्रभाव, आर्थिक निर्भरता और घरेलू सुधारों के मोर्चे पर कठिनाइयाँ कम नहीं होंगी। फिर भी, यह चुनाव मोल्दोवा के यूरोपीय भविष्य की दिशा तय करने वाला ‘मोमेंट ऑफ ट्रुथ’ है — एक ऐसा क्षण जो इसके भू-राजनीतिक मानचित्र को बदल सकता है।

संदर्भ: रॉयटर्स, मोल्दोवा चुनाव परिणाम


📝 UPSC Perspective / UPSC Relevance
1. प्रीलिम्स के लिए

  • अंतरराष्ट्रीय संगठन (EU): यूरोपीय संघ की संरचना, सदस्य देश, उम्मीदवार देश और विस्तार नीति।
  • नक्शा आधारित प्रश्न: मोल्दोवा, ट्रांसनिस्ट्रिया, रूस, यूक्रेन, रोमानिया आदि का स्थान।
  • समकालीन घटनाएँ: पूर्वी यूरोप में बदलते भू-राजनीतिक समीकरण।
2. मेन्स (GS Paper 2 – International Relations)
  • भू-राजनीतिक बदलाव: रूस के प्रभाव क्षेत्र से देशों का निकलना, NATO और EU की भूमिका, और इसका वैश्विक शक्ति-संतुलन पर असर।
  • भारत के लिए सबक: भारत के यूरोप के साथ कूटनीतिक, व्यापारिक और रणनीतिक रिश्तों पर प्रभाव।
  • लोकतांत्रिक संस्थाएँ और सुधार: EU सदस्यता के लिए आवश्यक सुधार और पारदर्शिता।
3. एथिक्स और निबंध (GS Paper 4 + Essay)
  • लोकतंत्र और स्वतंत्रता: मोल्दोवा की जनता ने किस प्रकार लोकतांत्रिक ढंग से अपना भविष्य चुना।
  • राष्ट्रीय हित बनाम बाहरी दबाव: छोटे देशों के लिए स्वतंत्र नीति बनाना क्यों कठिन होता है।
  • भ्रष्टाचार और प्रशासनिक सुधार: EU की सदस्यता के लिए सुधारों की शर्तें और इसका समाज पर प्रभाव।
4. संभावित UPSC प्रश्न
  • Prelims: “Which of the following countries shares a border with Moldova?”
  • Mains: “Discuss how Moldova’s recent parliamentary election reflects the shifting geopolitics of Eastern Europe. What lessons can India draw from it?”
  • Essay: “Democratic Choices in Small States: Challenges and Opportunities in a Multipolar World.”
5. सारांश

मोल्दोवा की प्रो-यूरोपीय पार्टी की जीत केवल एक चुनावी घटना नहीं बल्कि पूर्वी यूरोप में बदलते शक्ति संतुलन की गवाही है। UPSC के लिए यह घटना अंतरराष्ट्रीय संबंध, लोकतांत्रिक सुधार, EU और रूस के प्रभाव जैसे बहुआयामी विषयों को समझने का अवसर देती है।


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