US Arms Sales to Israel and Saudi Arabia: $15.7 Billion Deals Approved Amid Rising Middle East Tensions
अमेरिकी हथियार बिक्री: इज़राइल और सऊदी अरब को बड़ी डील्स के बीच मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव
परिचय
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हथियार बिक्री केवल व्यापारिक सौदे नहीं होतीं, बल्कि ये रणनीतिक गठबंधनों को मजबूत करने, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करने और भू-राजनीतिक संदेश देने का एक शक्तिशाली माध्यम हैं। जनवरी 2026 के अंत में, ट्रंप प्रशासन ने इज़राइल को लगभग 6.67 अरब डॉलर और सऊदी अरब को 9 अरब डॉलर मूल्य की हथियार बिक्री को मंजूरी दी। कुल मिलाकर ये सौदे लगभग 15.7 अरब डॉलर के हैं, जो अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा 30-31 जनवरी 2026 को घोषित किए गए। यह निर्णय मध्य पूर्व में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के ठीक बीच आया है, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। ये डील्स अमेरिका के प्रमुख सहयोगियों को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के प्रभाव को रोकने पर केंद्रित हैं।इज़राइल के लिए हथियार सौदा
इज़राइल को कुल 6.67 अरब डॉलर की यह बिक्री चार अलग-अलग पैकेज में विभाजित है। सबसे बड़ा हिस्सा 30 AH-64E Apache अटैक हेलीकॉप्टरों का है, जिनकी अनुमानित लागत 3.8 अरब डॉलर है। ये हेलीकॉप्टर उन्नत टारगेटिंग सिस्टम, Longbow फायर कंट्रोल रडार, नाइट विजन सेंसर और रॉकेट लॉन्चर से लैस होंगे, जो इज़राइल की हवाई हमले और ग्राउंड सपोर्ट क्षमता को काफी बढ़ाएंगे।
इसके अलावा, पैकेज में 3,250 Joint Light Tactical Vehicles (JLTV) शामिल हैं, जिनकी कीमत लगभग 1.98 अरब डॉलर है। ये हल्के टैक्टिकल वाहन इज़राइल की सेना को अधिक मोबाइल और सुरक्षित ग्राउंड ऑपरेशंस के लिए सक्षम बनाएंगे। अन्य हिस्सों में Namer आर्मर्ड पर्सनल कैरियर के पावर पैक (740 मिलियन डॉलर) और कुछ लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने इन सौदों को इज़राइल की सुरक्षा के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया है। बयान में कहा गया कि यह बिक्री अमेरिकी राष्ट्रीय हितों के अनुरूप है, क्योंकि इज़राइल को मजबूत आत्मरक्षा क्षमता बनाए रखना आवश्यक है। यह लंबे समय से चली आ रही अमेरिका-इज़राइल साझेदारी को दर्शाता है, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके प्रॉक्सी ग्रुप्स (जैसे हिजबुल्लाह) से उत्पन्न खतरों के संदर्भ में।सऊदी अरब के लिए हथियार सौदा
सऊदी अरब के लिए 9 अरब डॉलर का सौदा मुख्य रूप से Patriot Advanced Capability-3 (PAC-3) मिसाइल सेगमेंट एन्हांसमेंट पर केंद्रित है। इसमें लगभग 730 Patriot इंटरसेप्टर मिसाइलें और संबंधित उपकरण, गाइडेंस सिस्टम, स्पेयर पार्ट्स तथा ट्रेनिंग शामिल हैं। यह डील सऊदी अरब की वायु और मिसाइल रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए है, विशेषकर ईरान या उसके समर्थित हूती विद्रोहियों से आने वाले बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन हमलों के खिलाफ।
अमेरिकी विभाग ने इसे एक प्रमुख गैर-NATO सहयोगी की सुरक्षा बढ़ाने वाला बताया, जो खाड़ी क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। यह सौदा Lockheed Martin जैसी कंपनियों के लिए भी बड़ा अवसर है, क्योंकि Patriot सिस्टम की उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा रहा है।भू-राजनीतिक संदर्भ और निहितार्थ
ये सौदे मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच आए हैं। ट्रंप प्रशासन ईरान पर सैन्य हमलों की संभावना तलाश रहा है, जो क्षेत्र को और अस्थिर कर सकता है। इज़राइल और सऊदी अरब दोनों ईरान को प्रमुख खतरा मानते हैं—इज़राइल उसके परमाणु महत्वाकांक्षाओं और प्रॉक्सी हमलों से चिंतित है, जबकि सऊदी अरब यमन, सीरिया और अन्य क्षेत्रों में ईरान के साथ सीधी प्रतिद्वंद्विता में है।
इन डील्स से अमेरिका अपने सहयोगियों को सशक्त बनाकर ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है और एक मजबूत गठबंधन का संकेत दे रहा है। अमेरिकी रक्षा उद्योग—Boeing, Lockheed Martin आदि—को बड़े ऑर्डर मिलने से आर्थिक लाभ भी होगा। हालांकि, ये सौदे विवादास्पद हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे क्षेत्र में हथियारों की दौड़ तेज हो सकती है, शांति प्रयास प्रभावित होंगे और सऊदी अरब के मानवाधिकार रिकॉर्ड के बावजूद ऐसी बड़ी बिक्री अमेरिकी नीति की असंगतता को उजागर करती है। कुछ रिपोर्टों में कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया को बाइपास करने की भी आलोचना हुई है।निष्कर्ष
अमेरिकी हथियार बिक्री नीति मध्य पूर्व में उसके रणनीतिक हितों—सहयोगियों की सुरक्षा, ईरान का मुकाबला और क्षेत्रीय प्रभाव—का स्पष्ट प्रतिबिंब है। इज़राइल को Apache हेलीकॉप्टर और JLTV, तथा सऊदी अरब को Patriot मिसाइलें मिलने से दोनों देशों की सैन्य क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। कुल 15.7 अरब डॉलर के ये सौदे (कांग्रेस की मंजूरी और अंतिम समझौतों के अधीन) क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करेंगे। भविष्य में इनका असर ईरान के साथ बातचीत, क्षेत्रीय स्थिरता और अमेरिकी विदेश नीति की दिशा पर निर्भर करेगा। जब मध्य पूर्व युद्ध की कगार पर खड़ा है, तो ये डील्स न केवल सैन्य मजबूती का प्रतीक हैं, बल्कि बड़े भू-राजनीतिक खेल का हिस्सा भी।
(यह लेख Washington Post, Times of Israel, AP, Breaking Defense, Reuters, DSCA आधिकारिक अधिसूचनाओं और अन्य विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है।)
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