ग्रैमी अवार्ड 2026: दलाई लामा की करुणा की ध्वनि को मिली वैश्विक मान्यता
1 फरवरी 2026 की रात लॉस एंजिल्स में आयोजित 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स का मंच संगीत, रचनात्मकता और भावनाओं से जगमगा रहा था। परंतु उस रात का सबसे प्रभावशाली क्षण किसी पॉप स्टार या रॉक बैंड की प्रस्तुति नहीं, बल्कि करुणा, शांति और मानव एकता के संदेश को समर्पित एक ऐतिहासिक घोषणा थी।
90 वर्षीय तिब्बती आध्यात्मिक गुरु 14वें दलाई लामा (तेनजिन ग्यात्सो) को उनका पहला ग्रैमी अवॉर्ड प्रदान किया गया—एक ऐसा सम्मान, जिसने वैश्विक सांस्कृतिक चेतना की दिशा को ही रेखांकित कर दिया।
‘Meditations’: विचारों की वह ध्वनि, जो सीमाएँ पार करती है
दलाई लामा को Best Audiobook, Narration & Storytelling Recording श्रेणी में यह पुरस्कार उनकी स्पोकन-वर्ड ऑडियो रचना
Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama के लिए मिला।
इस ऑडियोबुक में दलाई लामा ने अंग्रेज़ी भाषा में शांति, करुणा, दयालुता, माइंडफुलनेस, पर्यावरण संरक्षण और मानवता की एकता जैसे दस मूलभूत विषयों पर अपने विचार साझा किए हैं। इन चिंतनपूर्ण शब्दों के साथ पृष्ठभूमि में भारतीय सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान तथा उनके पुत्र अमान अली बंगश और अयान अली बंगश द्वारा रचित संगीत ने इस कृति को एक विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभव में बदल दिया है।
यह रचना केवल किसी पुस्तक का ऑडियो संस्करण नहीं, बल्कि डिजिटल युग के लिए गढ़ा गया एक नया आध्यात्मिक माध्यम है, जो पॉडकास्ट और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के ज़रिये वैश्विक श्रोताओं तक पहुँचता है। समारोह में यह पुरस्कार दलाई लामा की ओर से कनाडाई गायक-गीतकार रूफस वेनराइट ने ग्रहण किया।
ग्रैमी मंच पर आध्यात्मिकता का प्रवेश
ग्रैमी अवॉर्ड्स अब तक पॉप, रैप, जैज़, रॉक और शास्त्रीय संगीत का उत्सव रहे हैं। ऐसे में एक ऐसा स्पोकन-वर्ड प्रोजेक्ट—जिसमें गीत नहीं, बल्कि विचार और संवेदना की लय है—का सर्वोच्च सम्मान पाना अपने आप में ऐतिहासिक है।
ट्रेवर नोआ, कैथी गार्वर और केतनजी ब्राउन जैक्सन जैसे चर्चित नामों को पीछे छोड़ते हुए दलाई लामा की यह जीत इस बात का संकेत है कि आज की दुनिया केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण शब्दों और नैतिक दृष्टि की भी उतनी ही भूखी है।
90 वर्ष की आयु में प्रेरणा का शिखर
90 वर्ष की आयु में ग्रैमी अवॉर्ड जीतना दलाई लामा को सबसे वरिष्ठ विजेताओं की श्रेणी में स्थापित करता है। 1959 से भारत में निर्वासन का जीवन जीते हुए उन्होंने जीवन भर अहिंसा, संवाद और करुणा का मार्ग दिखाया। यह सम्मान उनके लंबे संघर्ष, तिब्बत के प्रश्न पर वैश्विक जागरूकता और मानव मूल्यों के प्रति उनके अटूट समर्पण की मान्यता है।
यह उपलब्धि इस सत्य को पुष्ट करती है कि प्रभाव की कोई आयु नहीं होती।
“यह व्यक्तिगत नहीं, सार्वभौमिक सम्मान है”
पुरस्कार मिलने पर दलाई लामा ने कहा—
“मैं इसे कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूँ। यह मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि हमारी साझा सार्वभौमिक जिम्मेदारी की मान्यता है। शांति, करुणा, पर्यावरण की रक्षा और मानवता की एकता—आज आठ अरब लोगों के सामूहिक कल्याण के लिए यही सबसे आवश्यक मूल्य हैं।”
उनके शब्दों में यह स्पष्ट था कि यह ग्रैमी एक व्यक्ति से अधिक, एक विचार को सम्मानित करता है।
भारत के लिए गर्व और वैश्विक प्रतिक्रियाएँ
भारत, जहाँ दलाई लामा दशकों से रह रहे हैं, के लिए यह सम्मान विशेष गर्व का विषय है। भारतीय शास्त्रीय संगीतकारों की भागीदारी इस उपलब्धि को भारत–तिब्बत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सेतु का प्रतीक बनाती है।
वहीं, चीन द्वारा इस जीत को “राजनीतिक हेरफेर” कहे जाने ने यह भी दर्शाया कि दलाई लामा का नैतिक और वैचारिक प्रभाव आज भी वैश्विक राजनीति में कितनी गहराई से प्रतिध्वनित होता है।
निष्कर्ष: जब शांति की आवाज़ सबसे ऊँची होती है
ग्रैमी 2026 में दलाई लामा की जीत केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि एक संकेत है।
यह संकेत कि 21वीं सदी की दुनिया को अब केवल शक्ति, तकनीक और शोर नहीं, बल्कि करुणा, सह-अस्तित्व और नैतिक चेतना की आवश्यकता है।
जब चारों ओर तेज़ आवाज़ें और चमक-दमक हो, तब एक शांत, विचारशील स्वर—जो सीधे मानव हृदय से संवाद करता है—सबसे अधिक प्रभावशाली सिद्ध होता है।
दलाई लामा का यह ग्रैमी सम्मान हमें याद दिलाता है कि सच्ची महानता शोर में नहीं, बल्कि शांति और प्रेम की उस ध्वनि में बसती है जो सीमाओं से परे गूँजती है।
श्रोत (Source):
- 68th Annual Grammy Awards (2026) – Recording Academy (GRAMMYs) आधिकारिक घोषणा
- The Indian Express, The New Indian Express, Outlook India (फरवरी 2026 रिपोर्ट्स)
- GRAMMY Awards Official Website – Best Audiobook, Narration & Storytelling Recording category
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