Trump’s Executive Order on Venezuela’s Oil Revenue: Geopolitics, Sovereignty and Energy Power Politics
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला तेल राजस्व पर कार्यकारी आदेश
एक अकादमिक और विश्लेषणात्मक अध्ययन
भूमिका
जनवरी 2026 वेनेजुएला के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज हुआ। दशकों से राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक पतन और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहे इस लैटिन अमेरिकी देश में 3 जनवरी 2026 को एक अप्रत्याशित और नाटकीय घटना घटी। अमेरिकी विशेष बलों ने राजधानी काराकास में छापा मारकर राष्ट्रपति निकोलस मदुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। इस सैन्य अभियान को “ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व” नाम दिया गया।
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका वेनेजुएला को “सुरक्षित और उचित राजनीतिक संक्रमण” की दिशा में ले जाने में नेतृत्व करेगा। इसी क्रम में 9 जनवरी 2026 को ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य अमेरिकी ट्रेजरी खातों में रखे वेनेजुएला के तेल निर्यात से प्राप्त राजस्व को अदालतों या पुराने लेनदारों द्वारा जब्त किए जाने से बचाना था। इस आदेश को राष्ट्रीय आपातकाल के अंतर्गत जारी किया गया और कहा गया कि यह धन वेनेजुएला में “शांति, समृद्धि और स्थिरता” के लिए प्रयोग किया जाएगा।
यह घटनाक्रम न केवल वेनेजुएला की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता, आर्थिक प्रतिबंधों और ऊर्जा भू-राजनीति से जुड़े गहरे सवाल भी खड़े करता है।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
वेनेजुएला पिछले एक दशक से गहरे संकट में है। दुनिया के सबसे बड़े सिद्ध तेल भंडार होने के बावजूद, देश की अर्थव्यवस्था लगभग ढह चुकी थी। अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंधों, भ्रष्टाचार, कुशल प्रबंधन के अभाव और राजनीतिक टकराव ने तेल उत्पादन को ऐतिहासिक रूप से न्यूनतम स्तर तक गिरा दिया था।
3 जनवरी 2026 को अमेरिकी विशेष बलों ने काराकास में सैन्य कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को गिरफ्तार किया। उन्हें न्यूयॉर्क ले जाकर ड्रग तस्करी और अन्य गंभीर आरोपों में अदालत में पेश किया गया, जहां उन्होंने स्वयं को “युद्धबंदी” घोषित किया। इस कार्रवाई को अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय अपराधों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया, जबकि कई देशों ने इसे संप्रभुता का खुला उल्लंघन करार दिया।
9 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रमुख तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और लगभग 100 अरब डॉलर के संभावित निवेश की बात कही। इसी समय ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि अगले सप्ताह तक वेनेजुएला पर कुछ प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं ताकि तेल बिक्री को आसान बनाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि IMF और विश्व बैंक से बातचीत कर वेनेजुएला के फ्रीज किए गए लगभग 5 अरब डॉलर के विशेष आहरण अधिकार (SDR) को आर्थिक पुनर्निर्माण में लगाया जा सकता है।
कार्यकारी आदेश का स्वरूप और उद्देश्य
9 जनवरी 2026 को जारी कार्यकारी आदेश का मुख्य उद्देश्य यह था कि अमेरिकी ट्रेजरी खातों में जमा वेनेजुएला के तेल निर्यात से होने वाली आय को अदालतों या पुराने लेनदारों द्वारा जब्त न किया जा सके। इसमें विशेष रूप से उन कंपनियों का संदर्भ था जिनके वेनेजुएला पर अरबों डॉलर के दावे हैं, जैसे ExxonMobil और ConocoPhillips।
व्हाइट हाउस ने इसे “राष्ट्रीय आपातकाल” घोषित करते हुए कहा कि यदि यह धन लेनदारों या “दुष्ट तत्वों” के हाथों में गया तो इसका इस्तेमाल शांति और स्थिरता के बजाय अस्थिरता और अवैध गतिविधियों में हो सकता है। इसलिए इस धन को संरक्षित कर वेनेजुएला के पुनर्निर्माण में लगाने की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा का औचित्य
ट्रंप प्रशासन ने इस आदेश को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा। तर्क दिया गया कि यदि वेनेजुएला के तेल राजस्व पर नियंत्रण नहीं रखा गया, तो इसका लाभ ईरान, हिजबुल्लाह जैसे अमेरिका-विरोधी गुटों या ड्रग तस्करी नेटवर्क को मिल सकता है।
इस प्रकार, यह आदेश केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह अमेरिकी विदेश नीति की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है, जिसमें ऊर्जा संसाधनों को भू-राजनीतिक शक्ति के प्रमुख उपकरण के रूप में देखा जाता है।
आर्थिक और ऊर्जा भू-राजनीति
वेनेजुएला के पास विश्व का सबसे बड़ा सिद्ध तेल भंडार है, लेकिन उत्पादन वर्षों से गिरता रहा है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि अमेरिकी कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित कर उत्पादन को फिर से बढ़ाया जाएगा और वेनेजुएला को “फिर से समृद्ध” बनाया जाएगा।
इस नीति के पीछे केवल मानवीय या लोकतांत्रिक आदर्श नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अमेरिका की स्थिति को मजबूत करने की रणनीति भी दिखाई देती है। रूस, ईरान और ओपेक देशों के प्रभाव को संतुलित करने के लिए वेनेजुएला को अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र में लाना एक दीर्घकालिक भू-राजनीतिक लक्ष्य माना जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर सबसे बड़ा प्रश्न अंतरराष्ट्रीय कानून का है। फ्रांस सहित कई देशों ने मदुरो की गिरफ्तारी और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को वेनेजुएला की संप्रभुता का उल्लंघन बताया। संयुक्त राष्ट्र में भी इस पर तीखी बहस हुई।
अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, किसी संप्रभु राज्य में सैन्य हस्तक्षेप तभी वैध माना जाता है जब वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति से हो या आत्मरक्षा के सिद्धांत के अंतर्गत हो। अमेरिकी कार्रवाई इन दोनों कसौटियों पर विवादास्पद मानी गई।
यदि इस तरह के हस्तक्षेप को सामान्य मान लिया गया, तो यह वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरनाक उदाहरण बन सकता है, जहां शक्तिशाली देश अपने हितों के नाम पर कमजोर देशों में सीधे हस्तक्षेप करने लगें।
वेनेजुएला की आंतरिक राजनीतिक स्थिति
मदुरो की गिरफ्तारी के बाद डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया। सरकार ने राजनीतिक कैदियों की रिहाई शुरू की और लोकतांत्रिक संक्रमण का वादा किया। विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने इसे “मानवता के लिए बड़ा कदम” बताया।
फिर भी, जमीनी स्तर पर संकट समाप्त नहीं हुआ। महंगाई, बेरोजगारी, भोजन और दवाओं की कमी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। जनता के एक वर्ग को अमेरिकी हस्तक्षेप से उम्मीद है, जबकि दूसरा वर्ग इसे नई तरह की विदेशी दखलअंदाजी मानता है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी किया गया यह कार्यकारी आदेश वेनेजुएला संकट को सीधे अमेरिकी हितों से जोड़ता है—चाहे वह तेल उत्पादन बढ़ाने की रणनीति हो, ड्रग तस्करी पर नियंत्रण हो या क्षेत्रीय स्थिरता का दावा।
लेकिन इसके साथ ही यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और दीर्घकालिक विदेशी हस्तक्षेप के खतरों पर गंभीर बहस भी खड़ी करता है। वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार की संभावना जरूर है, पर यह इस बात पर निर्भर करेगा कि राजनीतिक संक्रमण कितना शांतिपूर्ण और स्थानीय स्वीकृति वाला होता है।
यह पूरा घटनाक्रम 21वीं सदी की भू-राजनीति में अमेरिकी शक्ति के प्रयोग का एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद अध्याय बन चुका है—जहां लोकतंत्र, मानवाधिकार, ऊर्जा राजनीति और सामरिक हित एक-दूसरे में गहराई से गुँथे हुए दिखाई देते हैं।
With Reuters Inputs
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