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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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President Droupadi Murmu’s Historic Visit to Angola and Botswana: Strengthening India’s Africa Partnership and Global South Leadership

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अंगोला और बोत्सवाना यात्रा: भारत–अफ्रीका साझेदारी का नया अध्याय

भूमिका

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की 8 से 13 नवम्बर 2025 तक की अंगोला और बोत्सवाना की छह दिवसीय राजकीय यात्रा भारतीय विदेश नीति के लिए ऐतिहासिक क्षण है। यह किसी भी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की इन दोनों देशों की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो भारत की अफ्रीका-केंद्रित नीति के गहरे होते आयामों को रेखांकित करती है। यह यात्रा केवल राजनयिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भारत की ग्लोबल साउथ नेतृत्व की सशक्त अभिव्यक्ति है, जिसमें ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, कृषि और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नया आयाम देने की योजना है।


भारत–अफ्रीका संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और अफ्रीका के बीच संबंध औपनिवेशिक युग से ही समान संघर्ष और साझा आकांक्षाओं पर आधारित रहे हैं। महात्मा गांधी का दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह आंदोलन और नेहरू का 1955 का बांडुंग सम्मेलन में एशिया–अफ्रीका एकजुटता का आह्वान, दोनों महाद्वीपों के बीच वैचारिक निकटता की नींव बने।

स्वतंत्रता के बाद भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन और दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South–South Cooperation) के माध्यम से अफ्रीकी देशों के साथ समानता, आत्मनिर्भरता और विकास साझेदारी को बढ़ावा दिया।
अफ्रीका भारत के लिए ऊर्जा, खनिज, बाजार और कूटनीतिक समर्थन का महत्त्वपूर्ण स्रोत रहा है। वहीं अफ्रीकी देशों के लिए भारत एक तकनीकी, शैक्षणिक और मानव संसाधन विकास सहयोगी के रूप में उभरा है।


यात्रा का पहला चरण: अंगोला

राष्ट्रपति मुर्मू 9 नवम्बर 2025 को अंगोला की राजधानी लुआंडा पहुँचीं, जहाँ उनका स्वागत विदेश मंत्री टेटे एंटोनियो ने किया।
भारत और अंगोला के बीच 1985 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे, और इस वर्ष उनकी 40वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।

अंगोला अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और भारत का एक प्रमुख ऊर्जा भागीदार भी। भारत को आयात होने वाले कच्चे तेल का लगभग 10% हिस्सा अंगोला से आता है। राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रक्षा और शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई समझौते (MoUs) तय किए जा रहे हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू अंगोला की संसद (National Assembly) को भी संबोधित करेंगी — जो किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष को दिया गया विशिष्ट सम्मान है। अपने भाषण में वह भारत–अंगोला के साझा उपनिवेश-विरोधी संघर्ष, लोकतंत्र और सतत विकास के आदर्शों पर बल देंगी।

इसके साथ ही राष्ट्रपति मुर्मू अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ समारोह में भी भाग लेंगी। इस यात्रा के दौरान वह लगभग 5,000 भारतीय प्रवासियों के समुदाय से भी मुलाकात करेंगी, जो स्थानीय व्यापार, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।


यात्रा का दूसरा चरण: बोत्सवाना

11 नवम्बर को राष्ट्रपति मुर्मू बोत्सवाना की राजधानी गबोरोन पहुँचेंगी।
भारत और बोत्सवाना के राजनयिक संबंध 1971 में स्थापित हुए थे, परंतु यह किसी भी भारतीय राष्ट्रपति की वहाँ की पहली यात्रा होगी।

राष्ट्रपति मुर्मू की बैठक बोत्सवाना के राष्ट्रपति ड्यूमा गिदोन बोको से होगी, जिनसे वह व्यापार, पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगी।
बोत्सवाना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हीरा उत्पादक देश है और भारत, विशेषकर सूरत, हीरा पॉलिशिंग उद्योग का वैश्विक केंद्र है। दोनों देशों के बीच हीरा उद्योग में वैल्यू एडिशन और स्किल ट्रांसफर को लेकर नई नीतियाँ तय की जा रही हैं।

इस यात्रा का एक प्रतीकात्मक किंतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण पहलू “प्रोजेक्ट चीता” है। प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में चीतों के स्थानांतरण से संबंधित एक कार्यक्रम में भाग लेंगी। भारत  बोत्सवाना से 8 चीतों को ले आकर मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित करेगा । इससे भारत और बोत्सवाना के बीच वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय सहयोग का नया अध्याय खुलेगा।


प्रमुख सहयोग क्षेत्र

  1. ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास –
    अंगोला की तेल क्षमता और भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग के बीच पारस्परिकता है। दोनों देश अब ग्रीन एनर्जी, हाइड्रोजन और सौर परियोजनाओं पर भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में अग्रसर हैं।

  2. व्यापार और निवेश –
    वर्तमान में भारत और अंगोला के बीच व्यापार लगभग 6.7 अरब डॉलर का है। लक्ष्य इसे 2030 तक 100 अरब डॉलर के भारत–अफ्रीका व्यापार लक्ष्य** के हिस्से के रूप में विस्तार देना है। बोत्सवाना में भारत हीरा शोधन केंद्र और लॉजिस्टिक हब स्थापित करने की दिशा में पहल कर रहा है।

  3. रक्षा एवं सुरक्षा –
    अंगोला के समुद्री क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों और गिनी की खाड़ी में समुद्री डकैती को देखते हुए, भारत वहाँ समुद्री निगरानी ड्रोन और नौसेना प्रशिक्षण सहयोग प्रस्तावित कर रहा है।

  4. कृषि और स्वास्थ्य –
    भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के तहत अफ्रीकी छात्रों को कृषि, सूचना तकनीक, स्वास्थ्य और औद्योगिक प्रशिक्षण में हर वर्ष 500 छात्रवृत्तियाँ दी जा रही हैं।
    अंगोला में बाजरा उत्पादन और बोत्सवाना में एचआईवी/एड्स नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में भारत की विशेषज्ञता साझा की जा रही है।


भू-राजनीतिक विश्लेषण

भारत की अफ्रीका नीति का यह नया चरण केवल आर्थिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक भूराजनीतिक महत्व है।
अफ्रीका के 54 देशों के समर्थन से भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की दावेदारी को बल देता है।

यह यात्रा चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत की एक संतुलित, विश्वसनीय और टिकाऊ साझेदारी का संदेश देती है।
अंगोला का चीन पर 43 अरब डॉलर का कर्ज भारत को एक “de-risked alternative partner” के रूप में प्रस्तुत करता है — जो संसाधन दोहन के बजाय क्षमता निर्माण और स्थानीय विकास पर केंद्रित है।

महिला नेतृत्व के दृष्टिकोण से भी यह यात्रा विशेष महत्व रखती है। राष्ट्रपति मुर्मू भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं, और उनका यह दौरा अफ्रीका की आदिवासी और महिला नेतृत्व की कथाओं से एक प्रतीकात्मक समानता रखता है।


संभावित परिणाम और चुनौतियाँ

इस यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच $2–3 अरब डॉलर के निवेश समझौते संभावित हैं।
अंगोला में ऊर्जा और अवसंरचना निवेश तथा बोत्सवाना में हीरा प्रोसेसिंग और पर्यावरणीय साझेदारी को प्राथमिकता दी जा रही है।

हालाँकि, चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं —

  • अंगोला में राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक असमानता विदेशी निवेश के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
  • बोत्सवाना की एलीट-प्रधान राजनीति आम जनता के स्तर पर भारतीय सहयोग के प्रभाव को सीमित कर सकती है।

इसलिए इस यात्रा की सफलता अंततः कार्यान्वयन और निरंतरता पर निर्भर करेगी।


निष्कर्ष

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अंगोला और बोत्सवाना यात्रा भारत की अफ्रीका नीति में कूटनीति और विकास का संतुलित संगम प्रस्तुत करती है।
यह यात्रा केवल दो देशों तक सीमित नहीं, बल्कि भारत की व्यापक अफ्रीका रणनीति का हिस्सा है — जो साझेदारी, समानता और सतत विकास के सिद्धांतों पर आधारित है।

इस यात्रा से भारत ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अफ्रीका के विकास में भागीदार के रूप में, न कि हितसाधक शक्ति के रूप में कार्य करना चाहता है।
यह भारत की “ग्लोबल साउथ डिप्लोमेसी” का वास्तविक उदाहरण है — जहाँ तकनीक, संस्कृति और मानवता के सेतु के माध्यम से नये वैश्विक संतुलन की दिशा तय की जा रही है।

अतः, यह कहा जा सकता है कि राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा केवल राजनयिक प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि भारत–अफ्रीका सहयोग के पुनर्जागरण का प्रतीक है — एक ऐसा कदम जो आने वाले वर्षों में दक्षिणी गोलार्ध की राजनीति और विकास की दिशा को गहराई से प्रभावित करेगा।


References

  • Ministry of External Affairs, Government of India. (2025, November). Press Briefing on President Murmu's Visit to Angola and Botswana. 
  • Additional context from bilateral trade data (UN Comtrade, 2024) and Project Cheetah updates (NTCA, 2025).
  • With India Today Inputs


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