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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

2026 U.S. Midterm Elections: Reuters/Ipsos Poll Reveals Tight Race Between Democrats and Republicans

2026 अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में रॉयटर्स/इप्सोस पोलिंग डैशबोर्ड: एक प्रारंभिक विश्लेषण

अमेरिकी राजनीति में मिडटर्म चुनाव (Midterm Elections) हमेशा से राष्ट्रपति के कार्यकाल के मध्य का एक “जनमत-सर्वेक्षण” माने जाते हैं। ये न केवल सत्ता में बैठे राष्ट्रपति के प्रदर्शन पर जनता की राय को प्रतिबिंबित करते हैं, बल्कि यह भी तय करते हैं कि शेष कार्यकाल के लिए नीति-निर्माण कितना सहज या कठिन होगा। 3 नवंबर 2026 को होने वाले आगामी मिडटर्म चुनावों में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटें और सीनेट की 100 में से 35 सीटें दांव पर होंगी।

इस बार चुनावी परिदृश्य को समझने में रॉयटर्स/इप्सोस पोलिंग डैशबोर्ड एक अहम भूमिका निभा रहा है। यह डैशबोर्ड अमेरिकी रजिस्टर्ड वोटर्स के बीच “Generic Congressional Ballot” यानी कि कौन-सी पार्टी को वोट देने की उनकी सामान्य प्रवृत्ति है, इसका नियमित आकलन करता है। इसके अलावा, यह cost of living, immigration, abortion, foreign policy जैसे मुद्दों पर जनता की प्राथमिकताओं को भी ट्रैक करता है। नवंबर 2025 तक अपडेट रहने वाला यह टूल चुनावी हवा के बदलते रुझान को रीयल टाइम में मापने का प्रयास करता है।


वर्तमान पोलिंग परिदृश्य

नवंबर 2025 के पहले सप्ताह तक जारी रॉयटर्स/इप्सोस के नवीनतम सर्वे के अनुसार, अमेरिकी मतदाता डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स के बीच लगभग बराबर बंटे हुए हैं। 5 नवंबर 2025 को अपडेट किए गए सर्वे में दोनों पार्टियों को लगभग समान समर्थन मिला है।

दिलचस्प रूप से, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जॉब अप्रूवल रेटिंग अब भी अपेक्षाकृत कम है — लगभग 57% अमेरिकी उनकी नीतियों से असंतुष्ट हैं। फिर भी, जेनेरिक बैलट में रिपब्लिकन्स बराबरी पर हैं, जो बताता है कि व्यक्तिगत अप्रूवल और पार्टी समर्थन के बीच स्पष्ट अंतर मौजूद है।

अन्य सर्वे एग्रीगेटर्स जैसे RealClearPolitics के अनुसार, अक्टूबर 2025 के अंत तक डेमोक्रेट्स को लगभग 2 प्रतिशत अंक की मामूली बढ़त (45.2% बनाम 43.2%) दिखाई दी थी। यह आंकड़ा ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मिडटर्म चुनावों में सत्ता-विरोधी पार्टी (incumbent opposition) को औसतन बढ़त मिलती है।

हालांकि कुछ आउटलायर पोल्स—जैसे Napolitan News Service—ने रिपब्लिकन्स को 8 अंकों की बढ़त दिखाई है, परंतु इन आंकड़ों की विश्वसनीयता सीमित मानी जा रही है क्योंकि ये मुख्यधारा के औसत से मेल नहीं खाते।

रॉयटर्स/इप्सोस की methodology पूरी तरह से ऑनलाइन पोलिंग पर आधारित है। इसमें देशभर के हजारों रजिस्टर्ड वोटर्स को चुना जाता है, और उनके डेटा को अमेरिकी जनगणना के प्रमुख मापदंडों—gender, age, race, education, region—के अनुसार वेट किया जाता है। इस सर्वे का margin of error लगभग 3 से 4 प्रतिशत के बीच रहता है, जो इसे तुलनात्मक रूप से विश्वसनीय बनाता है।


हाउस और सीनेट की वर्तमान स्थिति

2025 के अंत तक, रिपब्लिकन्स हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 219-213 की मामूली बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि सीनेट में उनका बहुमत 53-47 का है। यह शक्ति-संतुलन राष्ट्रपति ट्रंप के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके दूसरे कार्यकाल में नीति-निर्माण के लिए रिपब्लिकन समर्थन आवश्यक है।

इतिहास बताता है कि मिडटर्म चुनावों में सत्तारूढ़ पार्टी को औसतन सीटों का नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए 2026 में यदि यह पैटर्न दोहराया गया, तो यह डेमोक्रेट्स के पक्ष में काम कर सकता है

फिर भी, सीनेट का परिदृश्य डेमोक्रेट्स के लिए जटिल है। इस बार रिपब्लिकन्स को केवल 2 अत्यधिक प्रतिस्पर्धी सीटें (competitive seats) बचानी हैं, जबकि डेमोक्रेट्स को 6 कठिन सीटों पर डिफेंड करना है, जिनमें वेस्ट वर्जीनिया और नेवादा जैसे राज्य शामिल हैं।

दूसरी ओर, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स को सत्ता पलटने के लिए सिर्फ 3 सीटें फ्लिप करनी होंगी। इस स्थिति में यदि उनकी जेनेरिक बैलट में मामूली बढ़त बनी रहती है, तो हाउस पर उनका नियंत्रण संभव हो सकता है


प्रमुख मुद्दे और उभरते ट्रेंड्स

रॉयटर्स/इप्सोस पोलिंग डेटा के अनुसार, “Cost of Living” (जीवनयापन की लागत) अमेरिकी मतदाताओं के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। लगभग 55% मतदाता इसे अपनी शीर्ष प्राथमिकता बता रहे हैं।

इस मुद्दे पर मतदाताओं की राय दिलचस्प रूप से विभाजित है—

  • रिपब्लिकन्स को आर्थिक नीतियों (inflation control, taxation, job creation) पर अधिक भरोसेमंद माना जा रहा है।
  • वहीं डेमोक्रेट्स सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, न्यूनतम वेतन और हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी पर अधिक लोकप्रिय हैं।

इसके अतिरिक्त, immigration policy, abortion rights और foreign affairs (विशेषकर यूक्रेन और इज़राइल) जैसे मुद्दे भी मतदाताओं की प्राथमिकताओं में हैं।

एक और बड़ा कारक है रीडिस्ट्रिक्टिंग (Redistricting)—टेक्सास, फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में नए निर्वाचन नक्शों के कारण कई सीटें प्रतिस्पर्धी हो गई हैं। 2022 के बाद से बदलती सीमाएं हाउस में सत्ता संतुलन को गहराई से प्रभावित कर सकती हैं।

युवाओं और अल्पसंख्यकों की वोटिंग प्रवृत्ति भी निर्णायक बन सकती है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में युवा मतदाताओं ने डेमोक्रेट्स का समर्थन किया था, लेकिन यह समर्थन 2020 की तुलना में 9% कम हो गया जो उनके बीच बढ़ते आर्थिक असंतोष के कारण हुआ। अर्थात युवा मतदाता डेमोक्रेट्स से वैचारिक रूप से नहीं, बल्कि आर्थिक परिणामों की कमी से नाराज हैं।”

वे रिपब्लिकन्स की नीतियों से भी सहमत नहीं हैं, लेकिन डेमोक्रेट्स से अब उम्मीदें भी घट चुकी हैं।

इससे 2026 के मिडटर्म में “युवा मतदाता turnout” और “independent swing vote” निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं — पर पारंपरिक पार्टी वफादारी के बिना।


ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

यदि अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के ऐतिहासिक डेटा पर दृष्टि डालें, तो स्पष्ट होता है कि सत्ता में बैठी पार्टी को लगभग हमेशा नुकसान होता है।

  • 2010 में बराक ओबामा की पार्टी (Democrats) ने 63 सीटें खोई थीं।
  • 2018 में डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में रिपब्लिकन्स ने 40 सीटें गवांई थीं।
  • जबकि 2022 में राष्ट्रपति जो बाइडन के समय रिपब्लिकन्स ने मामूली बढ़त (222 सीटें) हासिल की थी।

इस संदर्भ में यदि 2026 का चुनाव भी यही पैटर्न दोहराता है, तो यह डेमोक्रेट्स के लिए अवसर लेकर आ सकता है। हालांकि, ट्रंप का मजबूत बेस और उच्च टर्नआउट मशीनरी रिपब्लिकन्स को बराबरी पर बनाए रख सकती है।


विश्लेषणात्मक निष्कर्ष

रॉयटर्स/इप्सोस पोलिंग डैशबोर्ड 2026 अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के लिए एक विश्वसनीय और गतिशील सूचकांक है, जो मतदाताओं के मूड में आने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों को पकड़ने में सक्षम है।

वर्तमान डेटा से स्पष्ट है कि —

  1. चुनावी दौड़ अभी पूरी तरह खुली है।
  2. डेमोक्रेट्स को मामूली जनमत बढ़त प्राप्त है, लेकिन यह बढ़त सांख्यिकीय त्रुटि सीमा के भीतर है।
  3. आर्थिक असंतोष, जीवनयापन की लागत, और रीडिस्ट्रिक्टिंग जैसे मुद्दे चुनाव के अंतिम परिणाम को गहराई से प्रभावित करेंगे।
  4. रिपब्लिकन्स का ग्रामीण और उपनगरीय क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन, बनाम डेमोक्रेट्स का शहरी और युवा वोटर्स पर फोकस, यह विभाजन फिर से राष्ट्रीय राजनीति की ध्रुवीकृत प्रकृति को उजागर कर सकता है।

अंततः, 2026 के मिडटर्म चुनाव अमेरिकी राजनीति में न केवल राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व की जन-स्वीकृति का परीक्षण होंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि अगले दो वर्षों में अमेरिका की आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय नीतियाँ किस दिशा में जाएंगी

रॉयटर्स/इप्सोस डैशबोर्ड के अनुसार, चुनावी हवा अभी “balanced equilibrium” की स्थिति में है। जैसे-जैसे नवंबर 2026 नजदीक आएगा, वोटर टर्नआउट, आर्थिक स्थिति, और प्रमुख राज्यों के रीडिस्ट्रिक्टिंग प्रभाव अंतिम परिणाम को निर्धारित करेंगे।


लेखक टिप्पणी: यह लेख मौलिक, विश्लेषणात्मक और डेटा-संलग्न रूप में तैयार किया गया है, जो रॉयटर्स/इप्सोस के नवंबर 2025 के पोलिंग डैशबोर्ड और अन्य प्रमुख सर्वे डेटा पर आधारित है।



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