AI Impact Summit 2026: How India Is Shaping the Future of Global AI Leadership from the Global South
भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026: महत्वाकांक्षा, नेतृत्व और चुनौतियों का संगम
परिचय
इक्कीसवीं सदी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन का प्रमुख चालक बन चुकी है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत ने AI को अपनी राष्ट्रीय विकास रणनीति के केंद्र में रखा है। इसी संदर्भ में 16 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत की दीर्घकालिक AI दृष्टि का सार्वजनिक घोषणापत्र बनकर उभरी।
समिट का उद्घाटन भारतीय प्रधानमंत्री मोदीजी ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की AI नीति “लाभ-केंद्रित” नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित, समावेशी और उत्तरदायी होगी। 20 फरवरी तक चलने वाली यह समिट ग्लोबल साउथ में आयोजित अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय AI सम्मेलन है—जो अपने आप में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का संकेत देता है।
समिट की परिकल्पना: People, Planet, Progress
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की वैचारिक धुरी तीन स्तंभों पर टिकी है—People (लोग), Planet (पर्यावरण) और Progress (प्रगति)। इस ढांचे के माध्यम से भारत ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि AI का मूल्यांकन केवल आर्थिक लाभ या तकनीकी श्रेष्ठता से नहीं, बल्कि उसके सामाजिक प्रभाव से होना चाहिए।
समिट में 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, 300+ प्रदर्शक, 600 से अधिक स्टार्टअप्स, नीति-निर्माता, शिक्षाविद और वैश्विक टेक उद्योग के शीर्ष नेतृत्व ने भाग लिया। अनुमानित 2.5 लाख से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति ने इसे केवल सम्मेलन नहीं, बल्कि एक AI महोत्सव का स्वरूप दे दिया।
वैश्विक AI विमर्श में भारत की भूमिका
अब तक वैश्विक AI विमर्श पर ग्लोबल नॉर्थ का वर्चस्व रहा है—जहाँ AI सुरक्षा, जोखिम और विनियमन को प्राथमिकता दी गई। इसके विपरीत, भारत ने इस समिट के माध्यम से AI for Development की अवधारणा को केंद्र में रखा।
भारत का तर्क स्पष्ट है:
- विकासशील देशों के लिए AI का सबसे बड़ा मूल्य स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, जलवायु अनुकूलन और सुशासन में निहित है।
- AI शासन (AI Governance) ऐसा होना चाहिए जो नवाचार को बाधित न करे, बल्कि उसे सार्वजनिक हित से जोड़े।
यह समिट UK AI Safety Summit और France AI Action Summit के बाद वैश्विक AI संवाद की तीसरी महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरी—जहाँ भारत ने “नियम-निर्माता” के बजाय “समाधान-प्रदाता” की भूमिका निभाने का प्रयास किया।
भारत AI मिशन और रणनीतिक महत्व
समिट के दौरान भारत AI मिशन की प्रमुख विशेषताओं को रेखांकित किया गया:
- सॉवरेन AI मॉडल: भारतीय भाषाओं, संदर्भों और आवश्यकताओं के अनुरूप AI प्रणालियाँ।
- डेमोक्रेटाइज्ड एक्सेस: स्टार्टअप्स, छात्रों और MSMEs के लिए AI संसाधनों की सुलभता।
- सरकारी निवेश: सार्वजनिक क्षेत्र में AI अनुसंधान और इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार।
यह दृष्टि भारत को केवल AI उपभोक्ता नहीं, बल्कि AI निर्माता और नैतिक मानक-निर्धारक के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षा दर्शाती है।
उद्घाटन दिवस की चुनौतियाँ: प्रबंधन बनाम महत्वाकांक्षा
जहाँ एक ओर समिट की वैचारिक ऊँचाई प्रशंसनीय रही, वहीं उद्घाटन दिवस की संगठनात्मक कमियाँ भी सामने आईं। भारी भीड़ के कारण:
- लंबी कतारें और अस्पष्ट एंट्री प्रोटोकॉल
- कमजोर साइनेज और सीमित बैठने की व्यवस्था
- इंटरनेट और वाई-फाई कनेक्टिविटी की समस्याएँ
- प्रधानमंत्री के आगमन से पूर्व सुरक्षा कारणों से एक्ज़िबिशन क्षेत्र को खाली कराना
कई स्टार्टअप्स और पत्रकारों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर असंतोष व्यक्त किया। आलोचकों के अनुसार, यह अव्यवस्था भारत की “डिजिटल पावर” की छवि के विपरीत प्रतीत हुई।
हालाँकि, यह भी सत्य है कि बिना प्रतिभागी सीमा के इतने विशाल आयोजन में ऐसी चुनौतियाँ असामान्य नहीं हैं। प्रश्न यह है कि क्या भारत भविष्य में महत्वाकांक्षा के साथ समान स्तर का प्रबंधन सुनिश्चित कर पाएगा?
आलोचना का व्यापक अर्थ
इन चुनौतियों को केवल प्रशासनिक विफलता के रूप में नहीं, बल्कि एक संक्रमणशील शक्ति की स्वाभाविक कठिनाइयों के रूप में देखना अधिक यथार्थवादी होगा। भारत उस दौर में है जहाँ वह नीति-निर्माण, वैश्विक नेतृत्व और घरेलू क्रियान्वयन—तीनों को एक साथ साधने का प्रयास कर रहा है।
यदि इन आलोचनाओं से सीख लेकर आगामी दिनों में व्यवस्थाएँ सुधारी जाती हैं, तो यह समिट भारत के लिए एक संस्थागत सीख बन सकती है।
निष्कर्ष: AI भविष्य की भारतीय परिकल्पना
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत की AI यात्रा में एक निर्णायक मोड़ है। यह सम्मेलन बताता है कि भारत केवल तकनीकी दौड़ में शामिल नहीं, बल्कि उस दौड़ की दिशा तय करने की क्षमता भी रखता है।
समिट की संगठनात्मक कमियाँ क्षणिक हैं, पर इसकी वैचारिक स्पष्टता दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ेगी। यदि भारत AI को वास्तविक सामाजिक समस्याओं—गरीबी, असमानता, जलवायु संकट और शासन सुधार—से जोड़ पाता है, तो वह न केवल ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करेगा, बल्कि वैश्विक AI नैतिकता का भी मार्गदर्शन करेगा।
अंततः, यह समिट इस सत्य को रेखांकित करती है कि AI का भविष्य केवल तकनीक का नहीं, बल्कि मूल्यों का प्रश्न है—और भारत इस बहस में अपनी सशक्त, जिम्मेदार और समावेशी आवाज़ के साथ उपस्थित है।
With Reuters and The Hindu Inputs
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