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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

India Fastest Growing Major Economy: World Bank Projects 7.2% Growth in FY26 Amid Global Slowdown

भारत वैश्विक मंदी के दौर में सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था

वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, ऊँची ब्याज दरों, व्यापारिक प्रतिबंधों और नीतिगत अनिश्चितताओं के बीच धीमी गति से आगे बढ़ रही है। ऐसे परिदृश्य में भारत न केवल अपनी मजबूत घरेलू मांग पर टिका हुआ है, बल्कि विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास दर बनाए रखकर वैश्विक आर्थिक स्थिरता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनता जा रहा है। विश्व बैंक की Global Economic Prospects रिपोर्ट (जनवरी 2026) के अनुसार, भारत वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने की राह पर है—यह अनुमान जून 2025 की पिछली भविष्यवाणी से 0.9 प्रतिशत अंक ऊपर है।

विश्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि दक्षिण एशिया क्षेत्र की कुल वृद्धि 2026 में 6.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जिसमें भारत की निर्णायक भूमिका है। वैश्विक विकास दर मात्र 2.6 प्रतिशत रहने के बावजूद भारत की यह स्थिति घरेलू उपभोग, कर सुधारों और ग्रामीण आय में सुधार जैसे आंतरिक कारकों से संभव हुई है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि अमेरिकी आयात शुल्कों (50 प्रतिशत तक) के प्रभाव को घरेलू मांग की मजबूती ने काफी हद तक संतुलित किया है।

हालिया तिमाही आंकड़े इस लचीलेपन को और पुष्ट करते हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, FY26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो छह तिमाहियों में सबसे तेज है। यह वृद्धि पिछले वर्ष की समान तिमाही के 5.6 प्रतिशत से कहीं अधिक है। विनिर्माण क्षेत्र की रिकवरी, सरकारी पूंजीगत व्यय और मजबूत ग्रामीण मांग ने इस प्रदर्शन को संभव बनाया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संरचनात्मक सुधारों का परिणाम है, जो विकास को अस्थायी उछाल से आगे ले जा रहा है।

टेक्सटाइल और परिधान निर्यात क्षेत्र ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अपनी लचीलापन दिखाई है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में इस क्षेत्र के निर्यात में 0.40 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 3.27 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा। यह लगातार दूसरा महीना है जब क्षेत्र ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। हैंडीक्राफ्ट्स (7.2 प्रतिशत), रेडीमेड गारमेंट्स (2.89 प्रतिशत) और मैन-मेड फाइबर (MMF) सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन रहा। हालांकि पूरे वर्ष 2025 में कुल निर्यात स्थिर रहा, लेकिन चुनिंदा उप-क्षेत्रों में वृद्धि और China+1 रणनीति तथा उत्पादन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं ने क्षेत्र को सहारा दिया है। यह क्षेत्र लाखों रोजगार सृजन और मूल्यवर्धित निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत इंजन बना हुआ है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, FY26 में सेवा क्षेत्र की वृद्धि 9.1 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो FY25 के 7.2 प्रतिशत से काफी अधिक है। वित्तीय सेवाएँ, रियल एस्टेट, पेशेवर सेवाएँ और सार्वजनिक प्रशासन जैसे उप-क्षेत्र 9.9 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं, जबकि होटल, परिवहन और संचार में 7.5 प्रतिशत की स्थिर वृद्धि अपेक्षित है। डिजिटल अर्थव्यवस्था, आईटी निर्यात, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वित्तीय समावेशन ने इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया है।

वैश्विक व्यापार तनाव और अमेरिकी टैरिफ जैसे बाहरी झटकों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था घरेलू शक्ति पर टिकी हुई है। FY27 के लिए विकास दर 6.5 प्रतिशत अनुमानित है, लेकिन सेवा क्षेत्र की मजबूती और निर्यात रिकवरी से मध्यम अवधि में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।

दीर्घकालिक दृष्टि से भारत को 2047 तक उच्च-आय अर्थव्यवस्था बनने के लिए औसतन 7.8 प्रतिशत की वृद्धि बनाए रखनी होगी। इसके लिए बुनियादी ढाँचे में निवेश, मानव पूंजी विकास, महिला श्रम भागीदारी में वृद्धि और निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहन जैसे क्षेत्रों में सुधार आवश्यक हैं।

भारत की वर्तमान विकास गति न केवल आंकड़ों की कहानी है, बल्कि नीतिगत स्थिरता, संरचनात्मक सुधारों और घरेलू मांग की ताकत की कहानी है। वैश्विक मंदी के बीच यह प्रदर्शन भारत को विकास के केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है—एक ऐसी अर्थव्यवस्था के रूप में जो चुनौतियों के बावजूद आत्मविश्वास से आगे बढ़ रही है। 🇮🇳

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