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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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Understanding Pakistan’s Strategic Importance: Why Global Powers Engage

पाकिस्तान की रणनीतिक प्रासंगिकता: वैश्विक शक्तियों के लिए अनिवार्य पड़ोसी

परिचय

दक्षिण एशिया की राजनीति में भारत और पाकिस्तान का संबंध लंबे समय से तनाव, प्रतिस्पर्धा और परस्पर अविश्वास से घिरा रहा है। 1947 के विभाजन से लेकर आज तक, इन दोनों देशों के बीच न केवल सीमित युद्ध हुए हैं, बल्कि एक वैचारिक और सुरक्षा-केंद्रित प्रतिद्वंद्विता भी कायम रही है। इसके बावजूद, पाकिस्तान वैश्विक शक्तियों — विशेषकर चीन, अमेरिका और हाल के वर्षों में रूस — के लिए लगातार रणनीतिक महत्व रखता है।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विश्लेषक कांति बजपाई के अनुसार, पाकिस्तान की यह प्रासंगिकता तीन प्रमुख तत्वों पर आधारित है — स्थान, विघटनकारी क्षमताएं, और शक्ति (जिसमें सैन्य, जनसांख्यिकीय, धार्मिक, प्रवासी और गठबंधन शक्ति शामिल है)। इन तीनों आयामों का संयोजन पाकिस्तान को विश्व शक्तियों के लिए एक ऐसा देश बनाता है जिसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।


1. स्थान: भू-राजनीतिक केंद्र में स्थित एक राष्ट्र

भूगोल ही पाकिस्तान की सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी है।
दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) के संगम पर स्थित यह देश चार महत्वपूर्ण देशों — भारत, चीन, ईरान और अफगानिस्तान — से सीमाएं साझा करता है। इस कारण यह एशियाई भू-राजनीति में एक “पुल राष्ट्र (Bridge State)” के रूप में उभरता है।

ग्वादर बंदरगाह इसका सर्वाधिक चर्चित उदाहरण है।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत विकसित यह बंदरगाह चीन को अरब सागर तक सीधी पहुँच प्रदान करता है — जिससे वह न केवल ऊर्जा आयात के लिए मलक्का जलडमरूमध्य पर अपनी निर्भरता घटा सकता है, बल्कि मध्य एशिया और अफ्रीका तक अपना व्यापार विस्तार भी कर सकता है।

साथ ही, अफगानिस्तान के समीप होने के कारण पाकिस्तान मध्य एशियाई ऊर्जा संसाधनों और राजनीतिक स्थिरता से जुड़ी भू-राजनीतिक समीकरणों में भी अहम भूमिका निभाता है। यही कारण है कि रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों ही पाकिस्तान के साथ सीमित सहयोग बनाए रखते हैं, ताकि क्षेत्रीय संतुलन और अफगानिस्तान की स्थिति पर प्रभाव डाला जा सके।


2. विघटनकारी क्षमताएं: अनिश्चितता के माध्यम से प्रभाव

पाकिस्तान का दूसरा बड़ा आयाम उसकी विघटनकारी शक्ति है — यानी ऐसी क्षमताएं जो उसे क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को प्रभावित करने की क्षमता देती हैं।

इसका सबसे प्रमुख पहलू है इसका परमाणु हथियार भंडार। 1998 के बाद से पाकिस्तान ने न केवल परमाणु क्षमता हासिल की बल्कि “टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन्स” विकसित कर अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत किया। यह क्षमता वैश्विक शक्तियों के लिए उसे नज़रअंदाज करना कठिन बनाती है, क्योंकि क्षेत्र में किसी भी संकट की स्थिति में पाकिस्तान का रुख निर्णायक हो सकता है।

इसके अलावा, पाकिस्तान की कुछ नीतियाँ — जैसे कि आतंकी समूहों के प्रति सहिष्णुता या समर्थन के आरोप, तथा भारत के साथ सीमा पार आतंकवाद के मामलों — ने इसे एक ‘अनिश्चित साझेदार’ के रूप में प्रस्तुत किया है।
2001 के बाद अमेरिका ने आतंकवाद के विरुद्ध अपने युद्ध में पाकिस्तान को एक प्रमुख सहयोगी के रूप में इस्तेमाल किया, परंतु तालिबान के प्रति इसके अस्पष्ट रुख ने इसे “दोहरी भूमिका निभाने वाला सहयोगी” बना दिया।

फिर भी, यही अनिश्चितता पाकिस्तान को “कूटनीतिक रूप से अनिवार्य” बनाती है — क्योंकि वैश्विक शक्तियाँ चाहती हैं कि इस तरह की विघटनकारी संभावनाएँ नियंत्रण में रहें, न कि उनके खिलाफ सक्रिय हों।


3. शक्ति: बहुआयामी प्रभाव के स्रोत

पाकिस्तान की शक्ति केवल सैन्य या परमाणु स्तर पर सीमित नहीं है; यह एक बहुआयामी संरचना है जिसमें सैन्य, जनसांख्यिकीय, धार्मिक, प्रवासी और गठबंधन शक्ति शामिल है।

(क) सैन्य शक्ति

पाकिस्तान की सेना उसकी सबसे संगठित और प्रभावशाली संस्था है।
लगभग सात लाख सक्रिय सैनिकों और एक विश्वसनीय परमाणु शस्त्रागार के साथ यह दक्षिण एशिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में से एक है। सेना का नियंत्रण न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा बल्कि विदेश नीति के कई पहलुओं तक फैला हुआ है। यह सेना ही पाकिस्तान की “सुरक्षा-राज्य पहचान” का मूल है।

(ख) जनसांख्यिकीय शक्ति

24 करोड़ से अधिक की जनसंख्या और युवा आबादी का बड़ा अनुपात पाकिस्तान को एक संभावित “जनसांख्यिकीय लाभ” प्रदान करता है।
यह युवा कार्यबल देश की अर्थव्यवस्था और रक्षा दोनों के लिए संसाधन उपलब्ध कराता है, हालांकि रोजगार और शिक्षा की चुनौतियाँ इस क्षमता को सीमित भी करती हैं।

(ग) इस्लामी प्रभाव

इस्लामी पहचान पाकिस्तान की विदेश नीति का अभिन्न हिस्सा है।
यह इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) में एक सक्रिय सदस्य है और सऊदी अरब, तुर्की, और कतर जैसे देशों के साथ धार्मिक-सांस्कृतिक संबंध बनाए रखता है। यह उसे इस्लामी विश्व में एक राजनीतिक आवाज़ देता है।

(घ) प्रवासी शक्ति

मध्य पूर्व, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में फैला पाकिस्तान का विशाल प्रवासी समुदाय आर्थिक और कूटनीतिक पूंजी का स्रोत है।
रेमिटेंस पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार का प्रमुख हिस्सा हैं, जबकि प्रवासी समुदाय सांस्कृतिक प्रभाव और सॉफ्ट पावर को भी बढ़ाता है।

(ङ) गठबंधन शक्ति

चीन, सऊदी अरब, और हाल ही में रूस के साथ पाकिस्तान के घनिष्ठ संबंध उसके वैश्विक समीकरण को और मजबूत करते हैं।
चीन के साथ साझेदारी (CPEC) इसे “चीन की बेल्ट एंड रोड पहल” का अहम स्तंभ बनाती है, जबकि सऊदी अरब से मिले वित्तीय सहयोग और रूस के साथ उभरते रक्षा-संबंध इसके बहुध्रुवीय विदेश नीति दृष्टिकोण को परिलक्षित करते हैं।


निष्कर्ष: रणनीतिक अनिवार्यता और वैश्विक यथार्थ

पाकिस्तान की वैश्विक प्रासंगिकता किसी एक कारक पर आधारित नहीं, बल्कि उसके स्थान, विघटनकारी क्षमता, और बहुआयामी शक्ति के सम्मिलित प्रभाव का परिणाम है।
विश्व शक्तियों के लिए यह देश न तो पूर्ण रूप से विश्वसनीय साझेदार है और न ही ऐसा प्रतिद्वंद्वी जिसे नज़रअंदाज किया जा सके।

भारत के दृष्टिकोण से यह यथार्थ एक रणनीतिक चुनौती भी है और कूटनीतिक अवसर भी — क्योंकि पाकिस्तान के साथ जुड़ी हर वैश्विक गतिविधि अप्रत्यक्ष रूप से भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति को प्रभावित करती है।

इसलिए, पाकिस्तान को समझना केवल पड़ोसी को जानना नहीं, बल्कि दक्षिण एशियाई और वैश्विक स्थिरता की रूपरेखा को समझना भी है।
कांति बजपाई के शब्दों में —

“पाकिस्तान की भू-राजनीतिक प्रासंगिकता इतनी गहरी है कि विश्व शक्तियाँ चाहे अनिच्छा से ही सही, उसके साथ जुड़ाव बनाए रखने के लिए बाध्य हैं।”


संदर्भ: The Indian Express "Understanding thy neighbour: Why Pakistan remains attractive to global powers." By कांति बजपाई (23/10/2025). 


UPSC Mains (Descriptive) संभावित प्रश्न:

1. “पाकिस्तान की वैश्विक शक्तियों के लिए रणनीतिक प्रासंगिकता उसके भू-स्थान, विघटनकारी क्षमताओं और बहुआयामी शक्ति के संयोजन से निर्मित होती है।”

इस कथन का विश्लेषण कीजिए और स्पष्ट कीजिए कि क्यों वैश्विक शक्तियाँ पाकिस्तान को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं?

2. भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव के बावजूद पाकिस्तान की वैश्विक भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है? अपने उत्तर में सैन्य, भू-राजनीतिक और कूटनीतिक पहलुओं का उल्लेख करें।

3. ग्वादर बंदरगाह और CPEC परियोजना पाकिस्तान की वैश्विक रणनीतिक स्थिति को कैसे प्रभावित करती है? अपने उत्तर में चीन और अन्य वैश्विक शक्तियों के दृष्टिकोण का विश्लेषण करें।

4. पाकिस्तान की विघटनकारी क्षमताओं (Disruptive Capabilities) के संदर्भ में भारत-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की वैश्विक रणनीतियों पर चर्चा करें।

5. पाकिस्तान की बहुआयामी शक्ति (सैन्य, जनसांख्यिकीय, इस्लामी, प्रवासी, और गठबंधन) वैश्विक नीति और क्षेत्रीय स्थिरता को कैसे प्रभावित करती है?

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