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Polity Point By Arvind Singh PK Rewa

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UPSC Current Affairs: 29 April 2025

दैनिक समसामयिकी लेख संकलन व विश्लेषण: 29 अप्रैल 2025

1-कूटनीति की विसंगति और न्याय की प्रतीक्षा


हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने न केवल भारत की आंतरिक सुरक्षा चिंताओं को एक बार फिर सामने रखा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया की प्रामाणिकता पर भी प्रश्न खड़े किए हैं। इस संदर्भ में चीन का यह बयान कि वह इस हमले की "निष्पक्ष जांच" का समर्थन करता है, सतही तौर पर सकारात्मक प्रतीत होता है, परंतु इसके भीतर छिपी रणनीतिक विडंबना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

दूसरी ओर, चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग को पुनः खोलने की अनुमति देकर एक धार्मिक-सांस्कृतिक संकेत भी भेजा है। यह वही चीन है जो अक्सर भारत की संवेदनशीलता के मुद्दों पर या तो चुप्पी साध लेता है या पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है। ऐसे में 'निष्पक्षता' शब्द का प्रयोग स्वयं में प्रश्नचिह्न बन जाता है।

इस द्वंद्व को प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट उन्नी की रचना में तीक्ष्ण व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जहाँ एक भारतीय तीर्थयात्री कैलाश की यात्रा करते हुए कहता है — "धन्यवाद, चीन, इस मार्ग को फिर से खोलने के लिए जिससे मैं ईश्वरीय निष्पक्षता के लिए प्रार्थना कर सकूं।" यह पंक्ति उस गहरे अविश्वास और नैतिक संकट को दर्शाती है जिससे भारत अक्सर दो-रुखी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के कारण गुजरता है।

चीन का 'निष्पक्षता' का समर्थन ऐसे समय में आया है जब वह लगातार सुरक्षा परिषद में जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के विरुद्ध प्रस्तावों को रोकता रहा है। ऐसे में यह समझना कठिन नहीं कि यह एक रणनीतिक कदम है — वैश्विक छवि को संतुलित करने और धार्मिक-सांस्कृतिक तानाबाना बनाए रखने का प्रयास, जिससे वह भारत को ‘engage’ तो करे लेकिन ‘commit’ न करे।

भारत को इस प्रासंगिक क्षण में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। एक ओर धार्मिक यात्राओं और सभ्यतागत संवादों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए, वहीं दूसरी ओर आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय नैतिकता के प्रश्नों पर अडिग रुख भी जरूरी है। भारत को यह स्पष्ट करना होगा कि धार्मिक नरमी कूटनीतिक जटिलताओं पर पर्दा नहीं डाल सकती।

न्याय की प्रतीक्षा अब केवल दैविक हस्तक्षेप पर नहीं छोड़ी जा सकती। यदि अंतरराष्ट्रीय तंत्र में 'निष्पक्षता' का स्थान वास्तव में सुनिश्चित करना है, तो भारत को बहुपक्षीय मंचों पर अपनी आवाज़ को और मुखर बनाना होगा, साथ ही घरेलू स्तर पर सुरक्षा और न्याय-व्यवस्था की बुनियाद को और सुदृढ़ करना होगा।

इंडियन एक्सप्रेस के कार्टून से प्रभावित लेख


2-शीर्षक: "यह टैरिफ्स हैं, बेवकूफ! ट्रंप ने कैसे मार्क कार्नी की जीत में भूमिका निभाई"

प्रस्तावना:

कनाडा के हालिया राजनीतिक परिदृश्य में एक अप्रत्याशित मोड़ तब आया जब पूर्व बैंक ऑफ इंग्लैंड गवर्नर मार्क कार्नी ने राजनीति में प्रवेश कर न केवल चुनावी मैदान में कदम रखा बल्कि चौंकाने वाली सफलता भी हासिल की। यह विजय केवल उनकी नीतिगत समझ या वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण का परिणाम नहीं थी, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार युद्ध नीति, विशेषकर टैरिफ रणनीति, ने अप्रत्यक्ष रूप से कार्नी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


1. ट्रंप के टैरिफ और कनाडा पर प्रभाव:

डोनाल्ड ट्रंप ने “America First” के नाम पर जिस तरह से स्टील और एल्युमिनियम पर भारी टैरिफ लगाए, उससे कनाडा की अर्थव्यवस्था को झटका लगा। ऑटोमोबाइल, निर्माण और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में उत्पादन लागत बढ़ी और हजारों नौकरियों पर संकट मंडराने लगा। इससे जनता के बीच अमेरिकी संरक्षणवाद के प्रति असंतोष और एक वैकल्पिक आर्थिक दृष्टिकोण की माँग पैदा हुई।


2. कार्नी का उदय: वैश्विक दृष्टि बनाम संरक्षणवाद

मार्क कार्नी का व्यक्तित्व एक वैश्विक आर्थिक विशेषज्ञ का रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से बहुपक्षीय व्यापार, हरित अर्थव्यवस्था और वित्तीय स्थिरता की वकालत की। जब ट्रंप की नीतियों से कनाडा की जनता आक्रोशित थी, कार्नी जैसे व्यक्तित्व ने एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरने का अवसर पाया। उनका अनुभव और वैश्विक संबंध उन्हें इस संकट से उबरने का सक्षम नेता सिद्ध करने लगे।


3. चुनावी विमर्श का परिवर्तन:

इस बार चुनावी बहस पारंपरिक मुद्दों से हटकर व्यापार नीति, आर्थिक संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर केंद्रित रही। कार्नी ने चुनाव प्रचार में स्पष्ट रूप से ट्रंप की टैरिफ नीति के दुष्परिणामों को रेखांकित किया और कनाडा के लिए एक स्वतंत्र और पर्यावरणीय रूप से स्थिर आर्थिक मॉडल की वकालत की।


4. उदारवादियों को पुनर्जागरण:

लिबरल पार्टी, जो पहले ही ट्रूडो सरकार के तहत कई मुद्दों पर दबाव में थी, को कार्नी जैसे नेता के माध्यम से नई ऊर्जा मिली। ट्रंप की टैरिफ नीति के प्रतिघात के बीच कार्नी का उदारवादी वैश्वीकरण दृष्टिकोण मतदाताओं को अधिक यथार्थवादी और विश्वसनीय प्रतीत हुआ।


निष्कर्ष:

मार्क कार्नी की राजनीतिक सफलता में उनकी विशेषज्ञता के साथ-साथ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा व्यापार नीति की भी अप्रत्यक्ष भूमिका रही। ट्रंप के टैरिफ ने जहां कनाडा की जनता को वैश्विक सहयोग की आवश्यकता का एहसास कराया, वहीं कार्नी जैसे वैश्विक नेतृत्वकर्ता को राजनीतिक मंच पर अवसर प्रदान किया। इसीलिए कहा गया — "It’s the tariffs, stupid!"


मुख्य स्रोतों की सूची (References):

1. United States Trade Representative (USTR) Reports, 2018–2020

2. CBC News: Canada responds to U.S. steel tariffs, 2020

3. World Economic Forum: Mark Carney’s Sustainable Finance Initiatives, 2021

4. The Economist: Profile on Mark Carney, August 2023

5. The Guardian: How Trump’s tariffs backfired in Canada, 2024



3-'जो धोनी ने झारखंड के लिए किया, वही वैभव बिहार के लिए कर रहा है' – युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा

जब बात क्रिकेट में प्रेरणा और संघर्ष की मिसाल की होती है, तो सबसे पहले नाम आता है महेंद्र सिंह धोनी का। झारखंड जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े राज्य से निकलकर भारत को विश्व विजेता बनाने वाले धोनी ने न केवल खेल में उत्कृष्टता दिखाई, बल्कि अपने राज्य के युवाओं को यह विश्वास दिलाया कि अगर जज़्बा हो तो कोई भी मुकाम नामुमकिन नहीं। आज वैसी ही प्रेरणादायक कहानी बिहार के वैभव सूर्यवंशी की है, जिसे लोग ‘बिहार का धोनी’ कहकर पुकारने लगे हैं।

वैभव सूर्यवंशी: संघर्ष से सफलता तक का सफर

वैभव सूर्यवंशी का सफर भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। सीमित संसाधनों, सामाजिक चुनौतियों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद उन्होंने खेल को अपना जीवन बना लिया। बिहार में क्रिकेट की पेशेवर ट्रेनिंग और सुविधाओं की कमी के बावजूद वैभव ने खुद को साबित किया और राज्य के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरे।

युवाओं में जागृत किया आत्मविश्वास

जिस तरह धोनी ने झारखंड के युवाओं को यह दिखाया कि इंटरनेशनल क्रिकेट उनके लिए भी एक हकीकत हो सकती है, ठीक उसी तरह वैभव ने बिहार के युवाओं को नई दृष्टि दी है। आज वैभव को देख बिहार के सैकड़ों बच्चे मैदान में उतरने का सपना देख रहे हैं, यह मानकर कि अगर मेहनत की जाए तो कोई भी मंच दूर नहीं।

सामाजिक बदलाव के वाहक

केवल खेल तक सीमित नहीं, वैभव सामाजिक रूप से भी एक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे ग्रामीण क्षेत्रों में कोचिंग कैंप, फ्री क्रिकेट ट्रेनिंग, और शारीरिक प्रशिक्षण जैसी पहल कर रहे हैं, जिससे युवाओं में नशा, बेरोजगारी और हताशा से लड़ने का जज्बा पैदा हो रहा है।

राजनीतिक और सामाजिक पहचान की ओर एक कदम

आज जब बिहार की पहचान राजनीतिक विवादों और पिछड़ेपन से जुड़ी होती है, वैभव जैसे युवा एक नया विमर्श प्रस्तुत करते हैं—कि बिहार में प्रतिभा की कमी नहीं है, केवल दिशा और अवसर चाहिए। सरकार और खेल संगठनों द्वारा यदि उन्हें उचित सहयोग मिले, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार का नाम रोशन कर सकते हैं।


निष्कर्ष:

वैभव सूर्यवंशी आज केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक आंदोलन हैं—बिहार के युवाओं की सोच, संघर्ष और सफलता का प्रतीक। जिस तरह धोनी झारखंड की प्रेरणा बने, वैभव भी आने वाले वर्षों में बिहार की उम्मीदों की नींव बन सकते हैं।

साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया


नीचे "पहलगाम हमले में मारे गए 26 लोगों के पीछे पाकिस्तानी पूर्व पैरा कमांडो की भूमिका" पर आधारित एक विश्लेषणात्मक और UPSC GS Paper 3 (आंतरिक सुरक्षा), Paper 2 (भारत-पाक संबंध), तथा निबंध दृष्टिकोण से उपयुक्त हिंदी लेख प्रस्तुत है:


4-पाकिस्तानी पूर्व पैरा कमांडो द्वारा अंजाम दिया गया पहलगाम हमला: राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न

भूमिका

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। हालिया जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस हमले के पीछे मुख्य मास्टरमाइंड एक पाकिस्तानी नागरिक था, जो पूर्व में पाकिस्तानी सेना के पैरा कमांडो बल का सदस्य रह चुका है। यह खुलासा भारत की आंतरिक सुरक्षा, पाकिस्तान की भूमिका, और आतंकवाद के बदलते स्वरूप को लेकर गहन विश्लेषण की मांग करता है।


मुख्य निष्कर्ष: हमलावर की सैन्य पृष्ठभूमि

  • राष्ट्रीय जांच एजेंसियों ने घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्यों, संचार इंटरसेप्ट्स और गुप्त सूचना के आधार पर इस हमले की योजना में शामिल एक आतंकी की पहचान की है, जो कि पूर्व पाकिस्तानी पैरा कमांडो था।
  • उसकी सैन्य ट्रेनिंग और गुप्त ऑपरेशन कौशल का इस्तेमाल इस घातक और सटीक हमले को अंजाम देने में हुआ।
  • हमले का लक्ष्य पर्यटकों को निशाना बनाना था। पर्यटन के माध्यम से कश्मीर में शांति स्थापना के भारत के प्रयासों को कमजोर करने की पाकिस्तान समर्थित रणनीति को दर्शाना था।

भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए निहितार्थ

  1. हाई-स्पेशलाइज्ड आतंकवाद का आगमन: पूर्व सैन्यकर्मियों का आतंकवाद में सक्रिय होना एक गंभीर खतरा है, क्योंकि वे आधुनिक युद्ध कौशल, रणनीति और हथियार संचालन में दक्ष होते हैं।
  2. सुरक्षा खुफिया की चुनौती: पारंपरिक आतंकियों की तुलना में ऐसे प्रशिक्षित आतंकी छुपने और हमला करने में कहीं अधिक सक्षम होते हैं, जिससे खुफिया विफलता की संभावना बढ़ जाती है।
  3. पर्यटन उद्योग पर प्रभाव: कश्मीर में पर्यटकों पर सीधा हमला न केवल जनहानि का कारण बना, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचाता है।

पाकिस्तान की भूमिका: एक बार फिर कठघरे में

  • यह घटना पाकिस्तान की 'प्रॉक्सी वॉर' नीति की पुनर्पुष्टि करती है।
  • इस बात के प्रमाण सामने आए हैं कि हमलावर को सीमा पार से लॉजिस्टिक सहायता, हथियार और नक्शे उपलब्ध कराए गए थे।
  • पाकिस्तान के पूर्व सैन्यकर्मी द्वारा ऐसा हमला अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एवं युद्ध नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

भारत की प्रतिक्रिया और नीति विकल्प

  1. डोमेस्टिक इंटेलिजेंस नेटवर्क का आधुनिकीकरण: स्थानीय सुरक्षाबलों को उच्च तकनीक और मानव खुफिया दोनों स्तरों पर मजबूत करना आवश्यक है।
  2. सीमा पर सतर्कता बढ़ाना: LoC पर अत्याधुनिक निगरानी उपकरणों की स्थापना तथा गश्त तेज करना होगा।
  3. राजनयिक दबाव और वैश्विक मंच पर उठाना: भारत को इस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
  4. प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक की नीति पर पुनर्विचार: यदि खुफिया इनपुट स्पष्ट हो, तो सीमित सैन्य कार्रवाई या सर्जिकल स्ट्राइक जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

नैतिक विमर्श

क्या आतंकवाद से लड़ते हुए हमें भी उन्हीं तरीकों को अपनाना चाहिए जो आतंकवादी अपनाते हैं? पूर्व सैन्यकर्मी यदि आतंक की राह पर जाते हैं, तो यह सैन्य नैतिकता की विफलता भी है। भारत को कानून और मानवाधिकार के दायरे में रहते हुए आतंक का जवाब देना होगा।


निष्कर्ष

पहलगाम हमला केवल एक आतंकी घटना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चेतावनी है — कि भारत को अब पारंपरिक आतंकवाद से इतर विशेषीकृत और सैन्य-प्रशिक्षित आतंकियों की चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। पाकिस्तान की भूमिका अब स्पष्ट और अंतरराष्ट्रीय निगरानी के योग्य है। भारत को इस अवसर का उपयोग अपने आंतरिक सुरक्षा ढांचे को सुदृढ़ करने और वैश्विक मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक नेतृत्व देने में करना चाहिए।


श्रोत सूची:

1. The Hindu – "Pahalgam attack mastermind was ex-SSG commando from Pakistan", 26 April 2025

2. Hindustan Times – "Intelligence Links Pahalgam Attack to Pakistani Ex-Para", 25 April 2025

3. Indian Express – "Who is Mujahid Baloch? Former Pakistani Commando Behind Attack", 27 April 2025

4. Ministry of Home Affairs, India – Press Briefing, 26 April 2025

5. United Nations Security Council Brief, 28 April 2025

6. ANI News – Field investigation updates, 25–27 April 2025

7. Reuters – Leaked report on cross-border terror links, 26 April 2025


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✍️ARVIND SINGH PK REWA

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 UPSC Current Affairs : April 2025 1-"नमामि गंगे" परियोजना की शुरुआत के एक दशक बाद इसकी उपलब्धियों और चुनौतियों की समीक्षा करें। (Review the achievements and challenges of the Namami Gange Project a decade after its launch.) उत्तर का प्रारूप: परिचय: "नमामि गंगे" योजना वर्ष 2014 में प्रारंभ की गई थी। इसका उद्देश्य गंगा नदी को स्वच्छ, अविरल और निर्मल बनाना है। यह भारत सरकार की एक फ्लैगशिप परियोजना है जो पर्यावरण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और अन्य निकायों के सहयोग से संचालित होती है। प्रमुख उपलब्धियाँ (Achievements): जल शुद्धिकरण संयंत्रों की स्थापना: अब तक 195 से अधिक STPs (Sewage Treatment Plants) स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से कई कार्यशील हैं। औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन: 1,100 से अधिक प्रदूषक उद्योगों की निगरानी की जा रही है और गंगा में अवैध अपशिष्ट छोड़े जाने की घटनाओं में गिरावट आई है। घाट विकास एवं सौंदर्यीकरण: हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर 150+ घाटों का निर्माण/पुनर्निर्माण किया गया है। नदी सतह की सफाई: रिवर स्किमर मशीनों द्व...

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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और कदम: DRDO व भारतीय सेना द्वारा MRSAM परीक्षण की सफलता हाल ही में DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) और भारतीय सेना ने ओडिशा के समुद्र तटीय क्षेत्र से मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) के चार उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। यह न केवल देश की सैन्य क्षमताओं को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक ठोस प्रगति भी है। MRSAM प्रणाली की विशेषताएँ: MRSAM, जिसे बाराक-8 के नाम से भी जाना जाता है, भारत-इज़राइल संयुक्त परियोजना का हिस्सा है। यह मिसाइल प्रणाली दुश्मन के विमानों, ड्रोन, हेलीकॉप्टरों और क्रूज़ मिसाइलों को 70-100 किमी तक की दूरी पर नष्ट करने में सक्षम है। एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की क्षमता। 360 डिग्री कवरेज व हाई रेस्पॉन्स टाइम। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के अनुकूल डिजाइन। रणनीतिक महत्व: यह परीक्षण भारतीय सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में वायु सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित करता है। भविष्य में स्वदेशी हथियार प्रणालियों ...