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Rising Attacks on Hindu Minorities in Bangladesh: Global Silence and Human Rights Concerns

The Silent Genocide: Persecution of Hindus in Bangladesh and the Moral Failure of the Global Community In an age where conflicts in Gaza, Ukraine, and other flashpoints command the world’s attention, a quieter yet deeply disturbing humanitarian crisis continues to unfold next door to India — in Bangladesh. Since the political upheaval and resignation of Prime Minister Sheikh Hasina in August 2024, reports of violence against the Hindu minority have escalated dramatically. Killings, arson attacks, vandalism of temples, forced displacement, economic boycotts, and intimidation have become frighteningly frequent. According to figures cited by Indian authorities, more than 2,200 incidents of violence against Hindus were recorded in 2024 alone , with similar patterns continuing through 2025 and into 2026. Independent reports corroborate these trends: homes torched, idols desecrated, businesses looted, and families compelled to flee ancestral lands. Yet, despite the mounting evidence, the w...

UPSC Current Affairs: 1May 2025

 दैनिक समसामयिकी लेख संकलन व विश्लेषण: 1 मई 2025

आज के इस अंक में निम्नलिखित 6 लेखों को संकलित किया गया है।सभी लेख UPSC लेबल का दृष्टिकोण विकसित करने के लिए बेहद उपयोगी हैं।

  • 1-क्या अमेरिका के पास है पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को कब्ज़े में लेने की गुप्त योजना?
  • 2-भारत-पाक व्यापारिक संबंधों में नया मोड़: भारत ने 'बैकडोर ट्रेड' पर कस कसा शिकंजा
  • 3-कार्नी की वापसी: भारत-कनाडा संबंधों के लिए एक नई शुरुआत की संभावना
  • 4-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई में WAVES 2025 शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया
  • 5-विषय: WAVES समिट 2025 में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन — 'रचनात्मक उत्तरदायित्व' की ओर एक वैश्विक आह्वान
  • 6-शीर्षक: WAVES अवॉर्ड्स की घोषणा और भारतीय सिनेमा के 5 दिग्गजों को समर्पित डाक टिकट: सांस्कृतिक विरासत का सम्मान



1-क्या अमेरिका के पास है पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को कब्ज़े में लेने की गुप्त योजना?

एक रणनीतिक, भू-राजनीतिक और सुरक्षा विश्लेषण

परिचय:

हाल ही में Economic Times की एक रिपोर्ट ने वैश्विक रणनीतिक हलकों में चर्चा को हवा दी है — क्या अमेरिका के पास एक ऐसा गुप्त "Plan B" है जिसके तहत वह पाकिस्तान की अस्थिरता की स्थिति में उसके परमाणु हथियारों को कब्जे में ले सकता है? यह प्रश्न सिर्फ एक सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा, परमाणु निरोधक सिद्धांत, और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


पृष्ठभूमि: पाकिस्तान का परमाणु ढांचा

  • पाकिस्तान ने 1998 में परमाणु परीक्षण कर दक्षिण एशिया में परमाणु शक्ति संतुलन को बदल दिया।
  • वर्तमान में पाकिस्तान के पास अनुमानतः 160–170 परमाणु हथियार हैं।
  • इसकी सुरक्षा प्रणाली का नाम है: CUSTODIAN – Strategic Plans Division (SPD), जो सेना के अधीन है।

अमेरिका की चिंता: क्यों जरूरी है 'Plan B'?

  1. राजनीतिक अस्थिरता:
    पाकिस्तान में बार-बार की राजनीतिक अस्थिरता, सेना और नागरिक सरकार के बीच संघर्ष, और आतंकवादी संगठनों की गहरी पैठ — ये सभी अमेरिका को चिंतित करते हैं कि कहीं इन हथियारों पर आतंकवादी समूहों का नियंत्रण न हो जाए।

  2. 'Loose Nukes' सिद्धांत:
    अमेरिकी नीति में ऐसे देशों के लिए "loose nukes" की धारणा रही है — यानी, कमजोर नियंत्रण प्रणाली वाले परमाणु देश।
    अफगानिस्तान से सेना की वापसी और तालिबान के बढ़ते प्रभाव के बाद यह डर और भी गहरा हुआ।

  3. प्रत्यक्ष कार्रवाई की संभावना:
    यदि पाकिस्तान पूर्ण विफलता की ओर बढ़ता है, तो अमेरिका अपने विशेष बलों (जैसे Navy SEALs) के माध्यम से तेज़ और गोपनीय मिशन के तहत परमाणु स्थलों को निष्क्रिय करने का प्रयास कर सकता है।


रणनीतिक परिणाम: भारत और दक्षिण एशिया के लिए निहितार्थ

  • भारत की चिंता: अमेरिका द्वारा ऐसी कोई भी कार्रवाई भारत के लिए दोहरा जोखिम उत्पन्न करती है — क्षेत्रीय अस्थिरता और शरणार्थी संकट।
  • चीन की भूमिका: चीन पाकिस्तान का रणनीतिक सहयोगी है। अमेरिकी हस्तक्षेप पर चीन की प्रतिक्रिया तनाव को और बढ़ा सकती है।
  • पाक-भारत परमाणु संतुलन: यदि पाकिस्तान अपने हथियार खोता है या उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं, तो भारत-पाक परमाणु संतुलन में असंतुलन पैदा होगा, जिससे तनाव और अधिक बढ़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय विधिक पहलू:

  • अमेरिका की कोई भी ऐसी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र चार्टर, की दृष्टि से विवादास्पद होगी।
  • लेकिन यदि वैश्विक सुरक्षा को खतरा दिखाया जाए (जैसे 9/11 के बाद हुआ), तो अमेरिका "preemptive self-defence" के तर्क का उपयोग कर सकता है।

निष्कर्ष:

हालांकि अमेरिका ने कभी आधिकारिक रूप से ऐसे किसी 'Plan B' की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उसकी सैन्य नीति और वैश्विक सुरक्षा रणनीति के संकेत बताते हैं कि पाकिस्तान की अस्थिरता की स्थिति में वह ऐसे विकल्प तैयार रखता है। भारत सहित पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए यह चेतावनी है कि परमाणु हथियारों की सुरक्षा केवल तकनीकी नहीं, राजनीतिक और कूटनीतिक स्थिरता पर भी निर्भर है।


UPSC दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण बिंदु:

  • GS Paper 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध, भारत-अमेरिका रणनीतिक सहयोग, परमाणु अप्रसार।
  • GS Paper 3: आंतरिक सुरक्षा, परमाणु नीति, आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग।
  • निबंध विषय: “परमाणु हथियार और वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन”, “राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक हस्तक्षेप का खतरा”


2-भारत-पाक व्यापारिक संबंधों में नया मोड़: भारत ने 'बैकडोर ट्रेड' पर कस कसा शिकंजा

एक रणनीतिक, कूटनीतिक और आर्थिक विश्लेषण

प्रस्तावना:

भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंध पिछले कुछ वर्षों में निरंतर गिरावट की ओर बढ़े हैं। पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) का दर्जा समाप्त कर दिया और द्विपक्षीय व्यापार लगभग शून्य कर दिया गया। 2024 तक स्थिति यह रही कि भारत ने पाकिस्तान से एक मिलियन डॉलर से भी कम का आयात किया — एक ऐसा आंकड़ा जो दर्शाता है कि व्यापारिक संबंध पूरी तरह निष्क्रिय हो चुके हैं।

लेकिन पाकिस्तान अभी भी भारत से विभिन्न मार्गों (विशेष रूप से तीसरे देशों के माध्यम से) उत्पाद आयात कर रहा था। अब भारत सरकार ने इन "बैकडोर चैनलों" पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।


बैकडोर ट्रेड क्या है?

  • प्रत्यक्ष द्विपक्षीय व्यापार बंद होने के बावजूद, कुछ पाकिस्तानी व्यापारी दुबई, सिंगापुर या मध्य एशियाई देशों के माध्यम से भारतीय वस्तुएं आयात कर रहे थे।
  • इसे "बैकडोर ट्रेड" या "राउटेड इम्पोर्ट" कहा जाता है, जिसमें स्रोत देश को छुपाकर तीसरे देश से वस्तुएं मंगाई जाती हैं।

भारत की कार्रवाई: अब क्या बदला है?

  1. HS कोड ट्रैकिंग सख्त की गई:
    भारत ने उन उत्पादों की पहचान की है जो अक्सर दुबई या अन्य देशों के ज़रिए पाकिस्तान पहुँच रहे हैं।

  2. रिवर्स इंटेलिजेंस नेटवर्क:
    व्यापार मंत्रालय और कस्टम विभाग ने विशेष निगरानी प्रणाली शुरू की है ताकि उत्पादों के अंतिम गंतव्य (end-use country) की सही पहचान हो सके।

  3. नो-ट्रेड क्लॉज पर ध्यान:**
    कुछ वस्तुओं की निर्यात अनुमति अब इस शर्त पर दी जा रही है कि वे पाकिस्तान या दुश्मन देशों को न पहुँचें।


रणनीतिक महत्व:

  • कूटनीतिक दबाव: भारत की यह नीति पाकिस्तान पर आर्थिक और राजनयिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है, खासकर जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था IMF सहायता पर निर्भर है।
  • आतंकवाद पर नकेल: पाकिस्तान को आर्थिक रूप से सीमित करने से उसकी आतंकी संगठनों को दी जाने वाली सहायता पर भी अंकुश लग सकता है।
  • राजनीतिक संकेत: यह कदम भारत के पड़ोसी देशों और वैश्विक मंच को एक सशक्त संदेश देता है — "आतंक और व्यापार साथ नहीं चल सकते।"

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और विकल्प:

  • पाकिस्तान के पास सीमित विकल्प हैं — चीन, तुर्की और ईरान जैसे देशों से आयात बढ़ाना।
  • लेकिन भारत जैसे किफायती और निकटवर्ती आपूर्तिकर्ता के बिना व्यापारिक लागत और महंगाई बढ़ेगी।

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:

  • भारत पर प्रभाव: नगण्य, क्योंकि पाकिस्तान में भारतीय निर्यात का हिस्सा पहले से ही अत्यंत कम था।
  • पाकिस्तान पर प्रभाव: कच्चे माल और औद्योगिक वस्तुओं की लागत में वृद्धि, जिससे महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ेगा।

निष्कर्ष:

भारत द्वारा बैकडोर ट्रेड पर लगाम कसना केवल एक व्यापारिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक रणनीतिक कदम है जिसका उद्देश्य पाकिस्तान को दो टूक संदेश देना है — जब तक सीमा पार आतंकवाद बंद नहीं होता, तब तक कोई व्यापारिक नरमी नहीं।


UPSC दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण बिंदु:

  • GS Paper 2: भारत-पड़ोसी संबंध, विदेश नीति में रणनीतिक प्रतिबंध।
  • GS Paper 3: व्यापार नीति, निर्यात-आयात विनियमन, आर्थिक सुरक्षा।
  • निबंध विषय: "आतंक और व्यापार: क्या सह-अस्तित्व संभव है?" या "कूटनीति के आर्थिक आयाम: व्यापार एक हथियार?"

स्रोत:

  • Economic Times, Defence & Economy Reports (30 अप्रैल 2025)।
  • भारत सरकार, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की हालिया रिपोर्टें।

3-कार्नी की वापसी: भारत-कनाडा संबंधों के लिए एक नई शुरुआत की संभावना

स्रोत: दैनिक जागरण, 1 मई 2025 (शीर्षक: "संबंधों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है कार्नी की जीत")

कनाडा के आम चुनावों में मार्क कार्नी के नेतृत्व में लिबरल पार्टी की संभावित वापसी भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक सकारात्मक मोड़ हो सकती है। जैसा कि हाल ही में प्रकाशित दैनिक जागरण की रिपोर्ट से स्पष्ट है, कार्नी ने चुनाव प्रचार के दौरान भारत के साथ बेहतर संबंधों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया, जो एक स्वागतयोग्य संकेत है।

बीते कुछ वर्षों में भारत-कनाडा संबंधों में खालिस्तानी गतिविधियों और भारत विरोधी बयानों के कारण अभूतपूर्व तनाव देखा गया। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद लगभग ठप हो गया, और राजनयिक संबंधों में ठंडापन आ गया। इस पृष्ठभूमि में, यदि कार्नी सत्ता में लौटते हैं, तो वह इस जमी हुई बर्फ को पिघलाने का अवसर ला सकते हैं।

मार्क कार्नी, जो पूर्व में बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर रह चुके हैं, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक संतुलित, व्यवहारिक और दूरदर्शी नेता माने जाते हैं। उनकी वापसी, खासकर आर्थिक दृष्टिकोण से भारत के लिए भी अवसर प्रदान कर सकती है। कनाडा की ऊर्जा, खनिज, शिक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भारत की भागीदारी बढ़ाने की संभावनाएं उनके नेतृत्व में मजबूत हो सकती हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कनाडा में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिकों और वहां के व्यापारिक समुदाय को भारत से जोड़ने के लिए कार्नी के पास एक व्यापक दृष्टिकोण है। वे न केवल संबंधों में स्थिरता लाना चाहते हैं, बल्कि कनाडा की भारत-नीति को दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग की दिशा में ले जाना चाहते हैं।

हालाँकि, महज सत्ता परिवर्तन से स्थिति नहीं सुधरेगी। दोनों पक्षों को कूटनीतिक संवाद की निरंतरता, परस्पर सम्मान और आंतरिक सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखनी होगी। खालिस्तानी मुद्दे पर स्पष्ट नीति और उसके प्रति शून्य सहनशीलता कनाडा की ओर से भारत को भरोसा दिलाने के लिए अनिवार्य होगी।

निष्कर्षतः, यदि कार्नी सत्ता में लौटते हैं और अपने वादों पर अमल करते हैं, तो भारत-कनाडा संबंधों में आई खटास को कम कर एक नई शुरुआत की जा सकती है। यह न केवल द्विपक्षीय लाभ के लिए उपयोगी होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी लोकतांत्रिक साझेदारों के रूप में एक मज़बूत संदेश देगा।

4-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई में WAVES 2025 शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया

यह एक प्रमुख वैश्विक सम्मेलन है जो भारत की ऑडियो-विज़ुअल, मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को वैश्विक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। आइए इस खबर को विस्तार से समझते हैं:


1. WAVES 2025 क्या है?

WAVES (World Audio Visual and Entertainment Summit) 2025 भारत में अपनी तरह का पहला और सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन है, जिसका उद्देश्य है:

  • क्रिएटिव इंडस्ट्री के वैश्विक प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाना
  • मीडिया, फिल्म, एनिमेशन, गेमिंग, ओटीटी, म्यूज़िक, वर्चुअल रिएलिटी, आदि क्षेत्रों में साझेदारी और नवाचार को बढ़ावा देना

थीम/टैगलाइन: “Connecting Creators, Connecting Countries”
(क्रिएटर्स को जोड़ना, देशों को जोड़ना)


2. भागीदारी और आयोजन की भव्यता:

  • 90+ देशों से प्रतिनिधियों की भागीदारी
  • 10,000+ डेलीगेट्स
  • 1,000 से अधिक कंटेंट क्रिएटर्स
  • 300+ कंपनियाँ और 350+ स्टार्टअप्स का प्रतिनिधित्व
  • आयोजन स्थल: मुंबई, भारत का फिल्म और मनोरंजन उद्योग का केंद्र

3. आयोजन का उद्देश्य:

  • भारत को वैश्विक मीडिया और एंटरटेनमेंट हब के रूप में प्रस्तुत करना
  • Startup ecosystem और innovation-driven content creation को प्रोत्साहन
  • टेक्नोलॉजी और क्रिएटिविटी के मेल से भारत की soft power को दुनिया में स्थापित करना

4. भारत के लिए रणनीतिक महत्व:

क) आर्थिक पहलू:

  • भारत की M&E (Media & Entertainment) इंडस्ट्री की अनुमानित वैल्यू 2024 में 3.5 लाख करोड़ रुपये के पार जा चुकी है
  • इससे नौकरी के अवसर, निर्यात और स्टार्टअप इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा

ख) सांस्कृतिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण से:

  • भारतीय संस्कृति, भाषा, संगीत, और कहानियों को वैश्विक मंच पर ले जाने का अवसर
  • सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी — जैसे अमेरिका की हॉलीवुड या कोरिया की के-पॉप

ग) डिजिटल इंडिया विज़न से जुड़ाव:

  • PM मोदी के डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया अभियानों से जुड़ा हुआ है
  • नई तकनीकों जैसे AI, AR/VR, Web3, VFX, Gaming के विकास में मदद

UPSC GS दृष्टिकोण से प्रासंगिकता:

GS Paper 2 (Governance, International Relations):

  • भारत की soft power diplomacy
  • भारत की वैश्विक साख में वृद्धि के लिए सांस्कृतिक और रचनात्मक मंचों का योगदान

GS Paper 3 (Economy, Science & Tech):

  • मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर का आर्थिक योगदान
  • स्टार्टअप्स और क्रिएटिव इंडस्ट्री में नवाचार का महत्व
  • emerging technologies (AI, AR/VR) के उपयोग

निबंध और इंटरव्यू के लिए बिंदु:

  • “India as a global soft power”
  • “Cultural Diplomacy and Digital India”
  • “Media, Technology and Society”

नीचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के WAVES समिट 2025 में दिए गए वक्तव्य पर आधारित एक विश्लेषणात्मक हिंदी लेख प्रस्तुत है, जो UPSC GS पेपर 2 और 4, निबंध, एवं समसामयिक दृष्टिकोण से उपयोगी है:


5-विषय: WAVES समिट 2025 में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन — 'रचनात्मक उत्तरदायित्व' की ओर एक वैश्विक आह्वान

प्रस्तावना:

1 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने WAVES (World Ayurveda, Vedas & Education Summit) समिट में ‘रचनात्मक उत्तरदायित्व’ (Creative Responsibility) की अवधारणा पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब दुनिया नई कहानी कहने की विधाओं की तलाश में है, तब "Create in India, Create for World" का यह सर्वोत्तम समय है। इस कथन में सांस्कृतिक नेतृत्व, विचारधारा की शुद्धता और वैश्विक नैरेटिव निर्माण की रणनीतिक दिशा छिपी है।


रचनात्मक उत्तरदायित्व का आशय:

रचनात्मक उत्तरदायित्व केवल कला, साहित्य या मीडिया में रचना करने की स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस जिम्मेदारी की ओर संकेत करता है जहाँ रचनाकारों को मानवता, संस्कृति और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को संरक्षित करना होता है।

  • प्रधानमंत्री ने युवाओं को "मानवता-विरोधी विचारों" से बचाने की आवश्यकता पर बल दिया, जो वर्तमान डिजिटल युग में अत्यंत प्रासंगिक है।
  • यह विचार केवल नकारात्मक कंटेंट से बचाव नहीं, बल्कि सकारात्मक, समावेशी और सृजनशील विमर्श को प्रोत्साहन देने की अपील है।

‘Create in India, Create for World’ — भारत के सांस्कृतिक नेतृत्व की ओर:

  • यह नारा ‘Make in India’ की तरह सांस्कृतिक उत्पादों और वैश्विक नैरेटिव निर्माण में भारत की भूमिका को उभारता है।
  • भारत की वेदों, उपनिषदों, योग, नाट्यशास्त्र और कथा परंपराओं की विश्व स्तर पर मांग है। अब समय है कि भारत अपनी मौलिक सांस्कृतिक दृष्टि को वैश्विक मंच पर रचनात्मक तरीकों से प्रस्तुत करे।

डिजिटल युग में कहानी कहने की नई विधाएं:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वर्चुअल रियलिटी, पॉडकास्ट्स और सोशल मीडिया आज के प्रमुख माध्यम हैं।
  • प्रधानमंत्री ने रचनात्मकता को तकनीक के साथ जोड़ने की आवश्यकता को पहचाना है — जहाँ भारतीय रचनाकार विश्व मंच पर नैतिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध सामग्री प्रस्तुत कर सकते हैं।

नीति और नैतिकता के संदर्भ में इसका महत्व (UPSC GS पेपर 2 और 4 के लिए):

  • यह भाषण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी सीमाओं के बीच संतुलन का संकेत देता है।
  • रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व, सत्यनिष्ठा और सांस्कृतिक अखंडता जैसी नैतिक अवधारणाओं पर बल देता है।

निष्कर्ष:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का WAVES समिट में दिया गया संदेश केवल एक सांस्कृतिक आह्वान नहीं, बल्कि भारत के रचनात्मक नेतृत्व की वैश्विक पुनर्स्थापना की दिशा में एक रणनीतिक पहल है। जब दुनिया नई कहानी कहने की राह खोज रही है, तब भारत की प्राचीन दृष्टि और आधुनिक रचनात्मकता मिलकर एक वैश्विक प्रेरणा बन सकती हैं।


6-शीर्षक: WAVES अवॉर्ड्स की घोषणा और भारतीय सिनेमा के 5 दिग्गजों को समर्पित डाक टिकट: सांस्कृतिक विरासत का सम्मान

परिचय:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में मुंबई में आयोजित 'वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंटरटेनमेंट समिट' (WAVES) का उद्घाटन करते हुए भारतीय सिनेमा की पांच महान हस्तियों के सम्मान में डाक टिकट जारी किए। इसके साथ ही 'WAVES अवॉर्ड्स' की भी घोषणा की गई, जो आने वाले समय में कला और मीडिया क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक बन सकता है।

डाक टिकट से सम्मानित हस्तियां:

भारतीय सिनेमा के जिन पांच दिग्गजों पर यह डाक टिकट जारी किए गए, वे हैं:

  1. गुरु दत्त – नवयथार्थवाद और भावनात्मक निर्देशन के प्रतीक रहे दिवंगत अभिनेता-निर्देशक।
  2. पी. भानुमति – दक्षिण भारतीय फिल्मों की बहुप्रतिभाशाली अभिनेत्री, लेखिका और गायिका।
  3. राज खोसला – रहस्य-रोमांच और संगीतप्रधान फिल्मों के लिए प्रसिद्ध निर्देशक।
  4. ऋत्विक घटक – समानांतर सिनेमा के पुरोधा, जिन्होंने बंगाली सिनेमा में गहराई और यथार्थवाद का समावेश किया।
  5. सलिल चौधरी – बहुभाषी संगीतकार, जिन्होंने हिंदी, बंगाली और दक्षिण भारतीय फिल्मों में नवाचार किया।

WAVES अवॉर्ड्स की घोषणा:

PM मोदी द्वारा घोषित 'WAVES अवॉर्ड्स' का उद्देश्य वैश्विक ऑडियो-विजुअल क्षेत्र में उत्कृष्टता को मान्यता देना है। यह पुरस्कार भारतीय फिल्म उद्योग की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करेंगे।

महत्व और विश्लेषण:

  • संस्कृति और विरासत का संरक्षण: यह पहल भारतीय कला, सिनेमा और सांस्कृतिक प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है।
  • फिल्म उद्योग को वैश्विक मंच: WAVES समिट और पुरस्कारों के माध्यम से भारत वैश्विक मीडिया और एंटरटेनमेंट उद्योग में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने की ओर अग्रसर है।
  • राष्ट्रीय सम्मान की भावना: डाक टिकट जारी कर के इन महान कलाकारों को स्थायी स्मरण दिया गया है, जो युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगा।

UPSC दृष्टिकोण से उपयोगिता:

  • GS पेपर 1 (भारतीय संस्कृति): भारतीय सिनेमा की विकास यात्रा और प्रमुख हस्तियों का योगदान।
  • GS पेपर 2 (संविधान एवं शासन): सांस्कृतिक नीतियों में सरकार की भूमिका।
  • निबंध/नैतिकता: सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, राष्ट्रीय चेतना का निर्माण।

निष्कर्ष:

WAVES समिट और इससे जुड़ी घोषणाएं केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और कलात्मक आत्मा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक प्रयास हैं। यह कदम न केवल अतीत की गौरवपूर्ण विरासत का सम्मान करता है, बल्कि भविष्य के कलाकारों और सृजनशीलता को भी दिशा प्रदान करता है।



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✍️ARVIND SINGH PK REWA

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ट्रंप द्वारा गाजा के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की घोषणा: शक्ति, शांति और पुनर्निर्माण के बीच एक जटिल प्रयोग प्रस्तावना 17 जनवरी 2026 को व्हाइट हाउस से की गई एक घोषणा ने मध्य पूर्व की राजनीति में नई बहस छेड़ दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा संघर्ष समाप्ति योजना के दूसरे चरण के अंतर्गत एक नई संस्था— ‘बोर्ड ऑफ पीस’ —के संस्थापक कार्यकारी सदस्यों की घोषणा की। इस बोर्ड का घोषित उद्देश्य गाजा में युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण, स्थिरीकरण, प्रशासनिक क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक विकास की निगरानी करना है। स्वयं ट्रंप इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं। यह पहल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 (2025) से जुड़ी बताई गई है, जिसने ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना को सैद्धांतिक समर्थन दिया था। यह घोषणा केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की मध्य पूर्व नीति, वैश्विक शासन संरचना और “शांति-निर्माण” की अवधारणा को लेकर कई बुनियादी प्रश्न खड़े करती है। पृष्ठभूमि: युद्ध से युद्धविराम तक अक्टूबर 2025 में हुए नाजुक युद्धविराम से पहले गाजा लगभग दो वर्षों तक भीषण युद्ध की चपेट में रहा। इस दौरा...

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हांगकांग–चीन संबंध और जिमी लाई मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रेस स्वतंत्रता और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य का समग्र अकादमिक विश्लेषण भूमिका हांगकांग आज केवल एक वैश्विक वित्तीय केंद्र नहीं, बल्कि इतिहास, राजनीति, कानून और मानवाधिकारों के जटिल संगम का प्रतीक बन चुका है। इसकी वर्तमान स्थिति को समझने के लिए उसके औपनिवेशिक अतीत, “एक देश–दो प्रणाली” की अवधारणा और हाल के वर्षों में लागू राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की भूमिका को समग्रता में देखना आवश्यक है। जिमी लाई का मामला इसी ऐतिहासिक और राजनीतिक परिवर्तन का जीवंत उदाहरण है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, न्यायिक प्रक्रिया और प्रेस स्वतंत्रता आमने-सामने खड़ी दिखाई देती हैं। 1. हांगकांग–चीन संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (क) चीन का पारंपरिक हिस्सा हांगकांग प्राचीन काल से चीनी साम्राज्यों का हिस्सा रहा। यह मुख्यतः मछली पकड़ने और स्थानीय व्यापार पर आधारित क्षेत्र था। मिंग और चिंग राजवंशों के समय इसे दक्षिण चीन का सामान्य तटीय इलाका माना जाता था। (ख) अफीम युद्ध और ब्रिटिश उपनिवेश 19वीं सदी में अफीम युद्धों ने हांगकांग के भाग्य को बदल दिया। 1842 की नानजि...

Why India Needs a Shadow Cabinet: Strengthening the Role of Opposition in a Modern Democracy

वर्तमान में भारत में विपक्ष की आवाज़ को सशक्त बनाने हेतु छाया मंत्रिमंडल की आवश्यकता एक समग्र अकादमिक विश्लेषण परिचय लोकतंत्र की आत्मा सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन में निहित होती है। जहां सत्तारूढ़ दल शासन, नीति-निर्माण और प्रशासन का दायित्व निभाता है, वहीं विपक्ष का कार्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों की समीक्षा, आलोचना और वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना होता है। एक स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष ‘नकारात्मक शक्ति’ नहीं, बल्कि रचनात्मक नियंत्रक (Constructive Watchdog) की भूमिका निभाता है। भारत, जो स्वयं को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र घोषित करता है, आज एक ऐसे राजनीतिक चरण से गुजर रहा है जहाँ विपक्ष की भूमिका कमजोर, बिखरी हुई और प्रतिक्रियात्मक दिखाई देती है। संसद के भीतर विमर्श का स्तर गिरा है और नीति-आलोचना प्रायः नारेबाज़ी या वॉकआउट तक सीमित रह जाती है। ऐसे परिदृश्य में छाया मंत्रिमंडल (Shadow Cabinet) की अवधारणा भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ को संस्थागत, संगठित और प्रभावी बनाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकती है। यह लेख भारत में छाया मंत्रिमंडल की आवश्यकता, उसके संभा...

Gig Workers in India: Pain, Challenges and 10-Minute Delivery Crisis in Quick Commerce Sector

भारत में गिग वर्कर्स की पीड़ा: क्विक कॉमर्स और 10 मिनट डिलीवरी संकट का विश्लेषण डिजिटल क्रांति ने जिस सबसे बड़े सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को जन्म दिया है, उसका एक प्रमुख रूप है—गिग इकोनॉमी। ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म्स ने काम को “ऑन-डिमांड” बना दिया है, जहाँ नौकरी स्थायी नहीं, बल्कि अस्थायी कार्यों की शृंखला है। उबर, ब्लिंकिट, ज़ेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और ज़ोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म्स इस मॉडल के प्रतीक हैं। पहली नज़र में यह व्यवस्था युवाओं को लचीलापन, तुरंत कमाई और तकनीक से जुड़ने का अवसर देती है, लेकिन इसी चमकदार परत के नीचे गिग वर्कर्स की पीड़ा, असुरक्षा और संघर्ष की एक लंबी कहानी छिपी है। भारत में यह समस्या विशेष रूप से क्विक कॉमर्स सेक्टर में दिखाई देती है, जहाँ “10 मिनट में डिलीवरी” जैसे वादों ने उपभोक्ताओं को तो सुविधा दी, लेकिन डिलीवरी पार्टनर्स के जीवन को जोखिम में डाल दिया। यह केवल तेज डिलीवरी का सवाल नहीं है, बल्कि यह उस आर्थिक मॉडल का सवाल है जो मुनाफे को श्रमिकों की सुरक्षा से ऊपर रखता है। गिग इकोनॉमी: अवसर और विरोधाभास गिग इकोनॉमी का मूल आकर्षण है—लचीलापन। कोई भी व्यक्ति अपनी सु...

Trump’s “Board of Peace”: From Gaza Plan to Global Conflict Resolution

ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’: गाजा से वैश्विक संघर्ष समाधान तक एक नया प्रयोग प्रस्तावना इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में वैश्विक राजनीति एक बार फिर संक्रमण के दौर से गुजर रही है। बहुपक्षीय संस्थाएं—विशेषकर संयुक्त राष्ट्र—लगातार यह आरोप झेल रही हैं कि वे तेज़ी से बदलते संघर्षों के समाधान में प्रभावी नहीं रह गई हैं। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में गाजा संकट के समाधान के लिए एक 20-सूत्रीय योजना पेश की और उसके दूसरे चरण में एक नई संस्था— ‘बोर्ड ऑफ पीस’ —की स्थापना की। जो पहल गाजा तक सीमित मानी जा रही थी, वह जनवरी 2026 में अचानक वैश्विक संघर्ष समाधान के मंच में बदलने लगी। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, बहुपक्षीयता और अमेरिका की भूमिका पर नए प्रश्न खड़े हो गए हैं। गाजा संकट और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की उत्पत्ति 2024–25 में इजरायल-हमास संघर्ष ने गाजा को मानवीय त्रासदी के केंद्र में ला खड़ा किया। लगातार युद्ध, विस्थापन, भुखमरी और बुनियादी ढांचे का विनाश अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चुनौती बन गया। इसी संदर्भ में सितंबर 2025 में ट्रंप ने ‘कॉम्प्रिहेंसिव प्लान टू एंड द गाजा क...

Frederick Merz’s India Visit and the “Indo-Europe” Idea: A New Strategic Geography

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज़ की भारत यात्रा और 'इंडो-यूरोप' की अवधारणा: एक रणनीतिक विश्लेषण प्रस्तावना वैश्विक भू-राजनीति में तेजी से बदलाव आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा नीतियां और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आक्रामक कूटनीति ने दुनिया को अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। ऐसे समय में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज़ की जनवरी 2026 में भारत की दो-दिवसीय आधिकारिक यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक नई रणनीतिक भूगोल की शुरुआत का संकेत देती है। प्रसिद्ध स्तंभकार सी. राजा मोहन ने इसे "इंडो-यूरोप" की संज्ञा दी है। यह अवधारणा भारत और यूरोप (विशेषकर जर्मनी) के बीच गहन सहयोग के माध्यम से अमेरिका और चीन के प्रभुत्व को संतुलित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह यात्रा 25 वर्षों के भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी और 75 वर्षों के राजनयिक संबंधों के उपलक्ष्य में हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यात्रा के प्रमुख परिणाम और समझौते मेर्ज़ की यात्रा 12-13 जनवरी 2026 को हुई, जो उनकी चांसलर बनने के बाद प...

India's Israel-Palestine Policy: From Traditional Palestinian Support to Strategic Balance with Israel (2026 Update)

भारत की इज़राइल-फिलिस्तीन विदेश नीति: नेहरू से मोदी तक इज़राइल–फिलिस्तीन विवाद बीसवीं सदी के सबसे जटिल और दीर्घकालिक भू-राजनीतिक संघर्षों में से एक है, जो 1947-48 के विभाजन और इज़राइल की स्थापना से लेकर आज के गाजा संकट तक फैला हुआ है। यह मुद्दा न केवल मध्य पूर्व की राजनीति को आकार देता है, बल्कि वैश्विक दक्षिण-उत्तरी संबद्धताओं, धार्मिक पहचान राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विमर्श का केंद्र बिंदु भी रहा है। भारत का रुख इस संदर्भ में विशेष रूप से अध्ययन-योग्य है, क्योंकि यह पारंपरिक रूप से फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय के समर्थक के रूप में जाना जाता है, जबकि हाल के दशकों में इज़राइल के साथ रणनीतिक साझेदारी भी गहराती जा रही है। यह द्वंद्व भारत की विदेश नीति की बहुआयामी प्रकृति को उजागर करता है, जिसमें ऐतिहासिक विरासत, वैचारिक आधार, भू-रणनीतिक हित, आर्थिक कारक और घरेलू राजनीतिक संवेदनशीलताएं शामिल हैं। इस विश्लेषण में हम इन आयामों का संतुलित परीक्षण करेंगे, विशेष रूप से 2023 के बाद की घटनाओं के प्रकाश में, जो दर्शाती हैं कि भारत किस प्रकार वैश्विक दबावों के बीच संतुलन साध रहा है। भारत की विदे...

Trump’s Gaza Peace Board and India’s Role: Strategic, Political and Ethical Analysis

ट्रंप की ‘गाजा शांति बोर्ड’ में भारत की संभावित भागीदारी: एक संतुलित विश्लेषण भूमिका इजरायल–हमास युद्ध के बाद गाजा पट्टी के भविष्य को लेकर वैश्विक स्तर पर कई योजनाएँ सामने आई हैं। इन्हीं में से एक है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस फॉर गाजा’ । इसका उद्देश्य गाजा में युद्धोत्तर शासन, सुरक्षा व्यवस्था और पुनर्निर्माण को एक अंतरराष्ट्रीय ढाँचे के तहत संचालित करना है। इस बोर्ड में भारत को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है। यह निमंत्रण केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका की स्वीकृति भी है। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या भारत को इस पहल का हिस्सा बनना चाहिए? और यदि हाँ, तो किस स्तर तक? यह लेख इसी प्रश्न का ऐतिहासिक, रणनीतिक और नैतिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करता है और अंत में एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करता है। पृष्ठभूमि: गाजा और ट्रंप की शांति योजना गाजा लंबे समय से इजरायल–फिलिस्तीन संघर्ष का केंद्र रहा है। हमास के नियंत्रण, इजरायली सैन्य कार्रवाइयों और मानवीय संकट ने इस क्षेत्र को वैश्विक चिंता का विषय बना दिया है। ट्रंप ...